50 वर्षों से अधिक समय से राजकीय कृषि बीज भंडार अंधेरे में।
शिकायत के बावजूद जिले के आला अधिकारी नहीं करा रहे निदान।
बछरावां रायबरेली- जहां एक तरफ केंद्र और राज्य सरकारें डिजिटल इंडिया बनाने की कोशिश कर रही हैं।वहीं दूसरी ओर विकास की तमाम योजनाओं को असली जामा पहने विकासखंड बछरावां में 50 वर्षों से अधिक समय से कृषि बीज भंडार में विद्युत आपूर्ति नहीं है। जिससे ऑनलाइन डाटा फीडिंग और अन्य तमाम सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में हो रही समस्या को जिले के आला अधिकारी शिकायत के बावजूद भी नहीं निदान करा रहे हैं।वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री की अति महत्वकांक्षी योजना किसान सम्मान निधि और किसान पंजीकरण भी किसानों को बाहर ही कराना पड़ता है।संवाददाता ने जब राजकीय कृषि बीज भंडार के प्रभारी वीरेंद्र सिंह से जानकारी ली तो बताया कि जब से मेरी तैनाती हुई है उससे पहले से ही यहां विद्युत कनेक्शन नहीं है।मेरे द्वारा जिले के अधिकारियों से कई बार शिकायत और सुझाव दिए गए लेकिन उनको नजर अंदाज कर दिया जाता है।हम किसानों के बीज खरीद सब्सिडी और किसान सम्मान निधि के ऑनलाइन फीडिंग भी नहीं करा पाते हैं और विद्युत कनेक्शन ना होने के कारण हमारे यहां कंप्यूटर में धूल छात्र खा रहा है यहां तक की प्रभारी ने बताया कि उदासीनता का आलम तो यह है जिले के अपने विभागीय अधिकारी से कई बार मांग की जा चुकी है कि यहां पर एक साफ सफाई के लिए एक कर्मचारी की भी तैनाती कि जाय।लेकिन उसकी भी अनदेखी की जाती है। अधिकारियों द्वारा मैं स्वयं प्रभारी होकर पहले ऑफिस खोलता हूं, उसके बाद पूरे ऑफिस और ऑफिस कैंपस में स्वयं झाड़ू लगाता हूं।विडंबना इस बात की है कि जिले के आला अधिकारी अपने नीचे के मातहत कर्मचारियों की मांगों और सुझाव की अनदेखी लगातार कर रहे हैं। लेकिन इसका खामियाजा बछरावां नगर से लेकर क्षेत्र के लाखों किसानों को उठाना पड़ता है।क्योंकि वह सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं पा रहे हैं।और जिले के कृषि विभाग के अधिकारी कुंभकरण की नींद सो रहे हैं।कब नींद से जागेगे और कब इस तरह की समस्याओं से उनके मातहत निदान पाएंगे और किसानों को कब लाभ मिलेगा यह सब यक्ष प्रश्न बने हुए हैं।
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