स्वर्ण भारत परिवार की महत्वाकांक्षी योजना गौ ग्राम दिसम्बर 2020 की जगह मार्च 2021 में होगी लांच : पीयूष पण्डित।
नीलम ब्यूरो दैनिक अक्षय मेल समाचारपत्र रायबरेली
स्वर्ण भारत का गौ ग्राम गौ मां को पूर्ण रूपेण सुख और शांति प्रदान करेगा
स्वर्ण भारत परिवार द्वारा प्रस्तावित गौ ग्राम की जमीन खरीदने की प्रक्रिया पूर्ण हो गई है अब जल्द ही गौ माता का गाँव बसाने के लिए उनके भवन का निर्माण की योजना पर काम चल रहा है । गौ ग्राम के मुखिया पीयूष पण्डित ने कहा हमारा यह प्रोजेक्ट हृदय से गौ रक्षा, गौ सेवा हेतु समर्पित है गौ मां की सेवा में किसी भी प्रकार की कमी नही होगी विश्व मे यह पहली योजना है जिसमे गौ माता का पूरा एक गाँव बसाने की तैयारी है धीरे धीरे इसका विस्तार शुरू होगा 500 गौ माताओं से गौ ग्राम का उद्घाटन अब कोरोना महामारी को देखते हुए दिसम्बर 2020 से मार्च 2021 में होने की उम्मीद जताई साथ ही स्वर्ण भारत देश विदेश में गौ प्रेमियों के लिए एक अद्भुत गाँव बसाने की तैयारी है जहाँ गौ पूजा गौ दर्शन व गौ कथा गौ लीला आप को देखकर अद्भुक्त शांति व पुण्य मिलेगा । मीडिया से बात करती हुई आस्ट्रेलिया से भारत भ्रमण पर आई रोशनी लाल जी ने कहा आज भारत वर्ष मे ही नहीं पूरे विश्व मे सभी मानव करीब करीब सुखी है पर जीव मात्र की माता कहलाने का अधिकार रखने वाली वेदों द्वारा पूज्यनीय, देवताओं को भी भोग और मोक्ष प्रदान करने की शक्ति रखने वाली गौ माता आज सड़कों पर मल, गन्दगी, प्लास्टिक खाने को मजबूर है |
पर भगवान श्री कृष्ण की कृपा से आज भी भारत वर्ष मे ही नहीं पूरे विश्व मे कुछ ऐसे पुण्यवान, भामाशाह और अपनी माँ के कोख को धन्य करने वाले गौ भक्त भी है, जिनके सहयोग से आज भी लाखो गौवंश गौशालाओं मे, किसानों के यहाँ, अपने घर पर ही सुरक्षित है | क्या ये गौभक्त, जिनकी वजह से पूरी सृष्टी का संतुलन बना हुआ है, आगे भी इसी प्रकार गौ - सेवा में संलग्न रह सकेंगे ? हँसआश्रम के डंडी स्वामी ने कहा शेष मानव जाति को जिनको परमात्मा ने सोचने के लिए बुद्धि दे रखी है का भी कर्तव्य बनता है कि इस गो संवर्धन को उठाने मे, इस राम सेतु को बनाने मे ग्वाल -बालो एवं गिलहरी की तरह थोडा - थोडा यथा योग्य योगदान दे | जब हम थोडा-थोडा योगदान देंगे तो हम सभी गौभक्तों के लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं रहेगा |
शास्त्र कहता है --- गौ भक्त जिस-जिस वस्तु की इच्छा करता है वह सब उसे प्राप्त होती है | स्त्रियों मे भी जो गौओं की भक्त है, वे मनोवांछित कामनाएं प्राप्त कर लेती है | पुत्रार्थी पुत्र पाता है, कन्यार्थी कन्या, धनार्थी धन, धर्मार्थी धर्म, विद्यार्थी विद्या और सुखार्थी सुख पा जाता है | विश्व भर मे कही भी गौभक्त को कुछ भी दुर्लभ नहीं है | यहाँ तक की मोक्ष भी बिना गाय के पूंछ पकडे संभव नहीं | वैतरणी पर यमराज एवं उसके गण भयभीत होकर गाय के पूंछ पकडे जीव को प्रणाम करते है |
देवताओं और दानवो के द्वारा समुद्र मंथन के वक्त ५ गायें उत्पन्न हुई, इनका नाम था- नंदा, सुभद्रा, सुरभि, सुशीला और बहुला | ये सभी गायें भगवान की आज्ञा से देवताओं और दानवों ने महर्षि जमदग्नि, भारद्वाज, वशिष्ट, असित और गौतम मुनि को समर्पित कर दीं | आज जितने भी देशी गौवंश भारत एवं इतर देशो मे है, वह सब इन्ही ५ गौओं की संताने है और हमारे पूर्वजो एवं ऋषियों का यह महाधन है | क्या हम सिर्फ गोत्र बताने के लिए ही अपने ऋषियों की संताने हैं? उनकी सम्पति गौ धन को बचाना हमारा कर्तव्य नहीं |
आज भारत वर्ष मे ही करोड़ों लोग सुबह - शाम देवालयों मे माथा टेक कर भगवान से मनोकामनाएँ मांगते है, पर इन मे से लाखों लोगो को यह तक भी मालूम नहीं है की जिस देवता से वे याचना कर रहे है उन्हें कुछ भी दे देने की शक्ति तभी आएगी जब हवन द्वारा अग्नि के मुख से देवताओं तक शुद्ध गौ घृत पहुंचेगा | जब हम हवन में गाय के घी से मिश्रित चरू देवताओं को अर्पण करते है | उस उत्तम हविष्य से देवता बलिष्ट एवं पुष्ट होते है | जब देवता शक्तिशाली होगा तभी अपनी शक्ती के बल पर आपकी-हमारी मनोकामनाएं पूरी करने मे समर्थ होंगे | पर जब गौवंश ही नहीं रहेगा तो शुद्ध गौ घृत कहा से आएगा? और शुद्ध गौ घृत नहीं होगा तो हवन कहा से होगा? और हवन नहीं होंगे तो देवता पुष्ट कैसे होंगे? और देवता पुष्ट नहीं होंगे तो शक्तिहीन देवता मनोकामनाएं पूर्ण कैसे करेँगे ? आज हम लोग पेड़ लगा देते है पानी खाद नहीं डालेंगे तो फल कहा से लगेंगे? यह प्रकृति के नियम के विरुद्ध है |
आज जितने भी कथाएं होती है, यज्ञ, अनुष्टान होते हैं, जप-तप होते है उनमें नाम-जप का कुछ प्रभाव पड़ता हो पर अंत मे जो यज्ञ होता है वह सफल कितने होते है यह राम को ही मालूम | क्योंकि इन यज्ञों मे शुद्ध गौ घृत का उपयोग नहीं के बराबर होता है | आज भारत वर्ष मे पूर्व की अपेक्षा यज्ञ, धर्म, कर्म अधिक हो रहे है पर फल नहीं मिलता, यज्ञ सफल नहीं होते, क्या कारण है? इसके मूल मे यही है की जिस धरती पर गौ, ब्राहमण, साधू-संत, स्त्री दुखी होते है वहां पर पुण्य कर्म फल नहीं देते | स्वर्ण भारत की महत्वाकांक्षी योजना गौ ग्राम ई विलेज में शीध्र शुरू होने की उम्मीद है जिससे हज़ारों गायों को एक साथ एक गाँव बसाने की चर्चा आम है ।जिला संवाददाता शैलेन्द्र मिश्रा रायबरेली


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