रमजान के मौके पर बसपा नेता मोहम्मद मुशीर ने प्रवासी मजदूरों को बांटे पानी, केला, बिस्किट

रायबरेली 

रमजान के मौके पर बसपा नेता मोहम्मद मुशीर ने प्रवासी मजदूरों को बांटे पानी, केला, बिस्किट

नीलम ब्यूरो हिन्दी दैनिक अक्षय मेल समाचार पत्र रायबरेली

रायबरेली ।।  कोविड-19 से पूरा देश संकट की घड़ी से जूझ रहा है जिसके कारण लॉक डाउन की स्थिति में रखा गया है।  "लोग कहते हैं कि दिल में सेवा भाव करने की लालसा हो तो क्या सड़क ?  क्या घर ? मनुष्य कहीं से भी रहकर सच्ची मानव सेवा कर सकता है"  और सभी धर्मों ने मानव सेवा को सबसे बड़ी सेवा का दर्जा दिया है  । ऐसा ही नजारा आज रायबरेली के झलकारी बाई चौक पर देखने को मिला रमजान के इस पावन दिन पर रोजा इफ्तार रखने वाले वरिष्ठ समाजसेवी,  बसपा के पूर्व जोन इंचार्ज रायबरेली - मोहम्मद मुशीर और उनके भाइयों ने इस चिलचिलाती धूप में मानव सेवा की मिसाल पेश करते हुए भूख - प्यास से बेहाल पैदल, साइकिल, रिक्शा या किसी वाहन से जा रहे प्रवासी मजदूर के लिए केला, बिस्किट, पानी आदि का वितरण किया । 

मोहम्मद मुशीर ने बताया कि कोरोना महामारी से मेरा देश संकट की घड़ी से जूझ रहा है लाग डाउन की वजह से सबसे ज्यादा दिहाड़ी मजदूर, रिक्शा चालक, गरीब, असहाय के जीवन को प्रभावित किया। मैं बुद्धिजीवियों, व्यापारियों समाजसेवियों, नेताओं से अपील करता हूं कि ऐसे में जिनके पास ईश्वर की कृपा से जरूरत से ज्यादा है वह आगे आकर इन जरूरतमंदों की सेवा करें । इस वैश्विक महामारी में जरूरतमंदों की सेवा ही अल्लाह की सबसे बड़ी इबादत है। जबसे लाक डाउन लागू किया गया है तभी से मेरे द्वारा लगातार जरूरतमंदों की मदद  किया जा रहा है ।  मेरा यही प्रयास रहा कि " भूखे को रोटी और प्यासे को पानी" से वंचित  न होना पड़े ।  इस समय स्थिति  और भयानक रूप धारण कर लिया क्योंकि बड़े-बड़े महानगरों में रहने वाले दिहाड़ी मजदूर, रिक्शा चालक, सड़कों के किनारे दुकान लगाने वाले गरीब असहाय अपने - अपने गांव का रुख जान जोखिम में डालकर हजारों किलोमीटर की दूरी अपने पग चिन्ह से तय करने का फैसला किया और अनजान, अनहोनी की आशंका की किए बिना ही घर से निकल पड़े और इस फैसले से ना जाने कितने मजदूरों की अभी तक जान भी चली गई हैं।  इन सभी मजदूर भाइयों की कठिनाइयों को देखकर मेरा हृदय बहुत ही द्रवित हुआ । इस पवित्र पावन दिन पर अल्लाह ताला से यही दुआ करता हूं जो भी भाई अपने घर जा रहे हैं सही सलामत अपने परिवार के बीच पहुंच सकें । रमजान के इस पावन दिन पर रोजा रखते हुए हमने भी भूख प्यास से बेहाल मजदूर भाइयों की कठिनाइयों को कुछ कम करते हुए मेरे मन में आत्म संतुष्टि का भाव पैदा हुआ क्योंकि आप संतुष्टि मानव का सबसे बड़ा सुख है । यह नि:स्वार्थ भाव से जनसेवा निरंतर जारी रहेगा और जरूरतमंदों की निस्वार्थ भाव से सेवा करता रहूं । 

इस मौके पर दाऊद, शाहनवाज, जानू, जाऊद रियाज, जुनैद आदि लोगों ने इस पुनीत कार्य में सहयोग किया।

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