यदुवंशियो के आस्था जा प्रतीक नंदमहर धाम के दर्शन मात्र से ही भूत प्रेत बाधा से मिल जाती है मुक्ति,बन जाते है बिगड़े काम।

यदुवंशियो के आस्था का प्रतीक नंद महर धाम के दर्शन मात्र से ही भूत प्रेत बाधा से मिल जाती है मुक्ति,बन जाते है बिगड़े काम।

अक्षय मेल समाचार

हरि प्रसाद यादव,अमेठी उत्तर प्रदेश(ब्यूरो):-

यदुवंशियों के आस्था का प्रतीक नन्द महर धाम में प्रत्येक वर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर प्रदेश ही नहीं पूरे देश के कोने-कोने से यदुवंशी श्रद्धालु इस पवित्र स्थल पर एकत्र होते हैं इस पवित्र स्थल पर ऐसी मान्यता है कि यहां के दर्शन मात्र से ही भूत प्रेत बाधा से मुक्ति मिल जाती है तथा बिगड़े हुए काम बन जाते हैं । इस बार मेले में लाखों श्रद्धालु की भीड़ पहुंची है। इस पवित्र स्थली पर पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी सोनिया गांधी शिवपाल सिंह यादव पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जैसे देश की महान हस्तियों ने इस पवित्र स्थल पर मत्था टेका है और आशीर्वाद प्राप्त किया है 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए एक यात्री निवास का शिलान्यास किया था जो वर्तमान में प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है इसमें श्रद्धालुओं को ठहरने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है बल्कि स्थानीय प्रशासन की गलत  नीतियों के कारण यात्री निवास भारतीय स्टेट बैंक के कब्जे में है। पैराणिक ग्रन्थों के अनुसार करुण देश उत्तर प्रदेश में अमेठी जिले के मुसाफिरखाना तहसील के मुख्यालय से 8 किलोमीटर दक्षिण दिशा में  स्थित नन्द महर धाम का राजा पौंड्रक था वह अपनी शरीर में चार भुजाओं को लगाकर अपने को भगवान विष्णु मानता था उसने एक दूत द्वारिका में भेजा और युद्ध के लिए भगवान श्रीकृष्ण को ललकारा भगवान श्री कृष्ण ने पौंड्रक को मृत्युदंड देने के लिए अपनी सेना लेकर करुण देश चले चल दिए जब यह समाचार गोकुल में बलराम जी ने सुना तो क्रोध में आकर भगवान श्रीकृष्ण का सहयोग करने के लिए तीव्र गति से उस तरफ गए । भगवान श्रीकृष्ण और पौण्ड्रक की लड़ाई बहुत दिनों तक चली अंत में भगवान श्रीकृष्ण ने पौंड्रक का वध करके बैकुंठ भेज दिया। पौंड्रक का मित्र काशी नरेश था उसका सिर कटकर उसके देश काशी में उसके दरवाजे पर जा गिरा। कई दिन बीत जाने पर बल राम को खोजते हुए नन्द बाबा आते हैं तो वहां करुण देश के वन में भगवान श्रीकृष्ण के साथ उन को पाते हैं वहां पर नन्द बाबा ने एक तालाब के पास पहुंच करके राजा बलि नामक एक वीर पुरुष को राजा बनाया और उनका सहयोग करने के लिए जोधा पॉवर को उनका मंत्री बन दिया।राजा बलि और जोधा पावर अपने ही राज्य कें वन में स्थित तालाब पर पूर्णिमा के दिन तीर्थ स्थान के लिए आए और उसी तालाब के निकट एक वटवृक्ष के नीचे अपनी विशाल शंख बजाय
उस विशाल शंख की धुन को सुन कर बन में अपने गायो को खोजते हुए ग्वालों को भ्रम हो गया कि यह लोग ही गायो के लुटेरे हैं ऐसा समझ कर पूजा अर्चना में लीन  राजा बलि एवं जोधा पावर को मार डाला। नन्द बाबा जहां भगवान श्री कृष्ण और बलराम से मिले थे अब उस स्थान को नंद महर के नाम से जाना जाता है। अब करुण प्रदेश ब्रज धाम के रूप में बदल गया क्योंकि वहां की बहुत सी जनता आकर करुण देश के हर करनपुर बसाइतपुर नंदियावां आदि गांव में बस गई यहां पर बाबा नन्द का प्यारा मंदिर है सुशोभित है और इस मंदिर में रहने वाले राजा बलि का नाम चारो ओर बिख्यात है। राजा बलि  यादव वंश के पूज्य मान देवता कह जाते हैं दूर-दूर गांव के बहुत से लोग यहां इनकी  पूजा अर्चना करने आते हैं यहां पर राजा बल के सेनापति जोधापावर हैं ।यह अपने स्वामी राजा बल के साथ रहते हैं बहुत से लोग अपने घर के भीतर राजा बल की  चौरी बनाकर पूजा करते हैं उस पूजा से प्रसन्न होकर राजा बलि उस घर के भूत प्रेतों तथा अन्य प्रकार की सभी बाधाओं से मुक्ति प्रदान करते हैं घर में पूजा करने पर राजा बलि धन और धर्म को बढ़ाते हैं तथा सिद्ध हुए सेवक के बुलाने पर तुरंत उसके पास उसकी रक्षा करने के लिए आ जाते हैं यहां पर प्रत्येक मंगलवार को मेला लगता है लोग यहां पुष्प दूध आज चाहते हैं बहुत से लोग हवन पूजन करते हैं हवन मंत्र ॐ नमो नन्द महर नाथाय राजा बली देवाय स्वाहा और साथ में जोधा पावर जो भी हवन मंत्र ॐ नमो नन्द महर जोधा देवाय स्वाहा।

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1 टिप्पणियाँ

  1. काफी अलग जानकारी मिली , पढ़कर अच्छा लगा . आपसे और विस्तृत जानकारी उपलब्ध हो सके तो कृपया बताइएगा.. ब्लोगर्स और समाचार पत्र राजा बलि , बलराम जी को बताते है तथा किसी गॅजेट का जिक्र करते है , जिसमें बलराम और उनके अंगरक्षक को राजा बलि एवम पवरिया बताया गया है . साथ ही कोई पचोरा गीत का उल्लेख है . क्या आप इस पचोरा गीत को शेयर कर सकते है ?

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