अवधी कवि आनन्द गिरि मायालु भारत में " अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक गौरव सम्मान " से सम्मानित
सक्ति, छत्तीसगढ़। मार्च 23, नेपाल के युवा साहित्यकार तथा भाषिक अभियंता आनन्द गिरि मायालु को सम्मानित किया गया है।
छत्तीसगढ़ के सक्ति जिले में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में नेपाल के बांके जिला निवासी युवा कवि, लेखक, पत्रकार, साहित्यकार, मोटिवेशन स्पीकर तथा सॉफ्ट स्किल ट्रेनर आनन्द गिरि मायालु को अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया है।
राज्य की ख्याति प्राप्त सांगीतिक संस्था श्याम संगीत सृजन संस्थान द्वारा आयोजित कार्यक्रम में आधा दर्जन कवि, लेखक तथा सांगीतिक प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया है।
नेपाल में अवधी भाषा, साहित्य, कला, संस्कृति के संरक्षण संवर्द्धन प्रचार प्रसार के क्षेत्र में अति विशिष्ट योगदान के लिए भाषा विज्ञ मायालु को सम्मानित किया गया है। ज्ञात हो कि भाषा विज्ञ आनन्द गिरि मायालु को अब तक देश विदेश से दर्जनों प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं। तथा देश विदेश की विभिन्न पत्रिकाओं में दो हजार से अधिक शोध लेख तथा अवधी कविताएं प्रकाशित हो चुकी हैं। कवि मायालु का नेपाल भारत मैत्री सम्बंध स्थापित करने तथा साहित्यिक पर्यटन विकास अंतर्गत भारत के कवियों और लेखकों को नेपाल के प्रमुख पर्यटकीय स्थलों का भ्रमण कराने में विशेष योगदान रहा है।
अवधी भाषा की साहित्यिक पत्रिका फुलवारी और नवा नेपाल के संपादक रह चुके आनन्द गिरि मायालु को इसी वर्ष मथुरा की संस्था पंडित नथाराम गौड़ लोक साहित्य शोध संस्थान, हाथरस तथा अंतर्राष्ट्रीय साहित्य कला संस्कृति केंद्र, मथुरा की ओर से संयुक्त रूप में इंटरनेशनल लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड 2025 सम्मान मिल चुका है। कवि मायालु अवधी भाषा काव्य, कथा तथा निबंध विधा में लेखन के साथ ही अवधी संस्कृति की मूर्त अमूर्त सम्पदा संरक्षण संवर्द्धन में भी कार्य करते आए हैं।
संस्था अध्यक्ष संगीतज्ञ श्याम कुमार चन्द्रा ने आनन्द गिरि मायालु को सम्मानित करते हुए कहा - " नेपाल के युवा साहित्यकार तथा भाषिक अभियंता मायालु का मातृभाषा अवधी के विकास तथा संरक्षण संवर्द्धन में अति विशिष्ट उल्लेखनीय योगदान रहा, ऐसी विशिष्ट प्रतिभा को सम्मानित कर संस्था गौरवान्वित महसूस करती है। "
श्याम संगीत सृजन संस्थान छत्तीसगढ़ की संगीत क्षेत्र की अग्रणी संस्था है जो विगत कई वर्षों से संगीत शिक्षा देती आई है।
कार्यक्रम में अपना मतव्य रखते हुए आनन्द गिरि मायालु ने कहा - " अपनी मातृभाषा के लिए कुछ कार्य करते हुए खुशी होती है, सभी को विदेशी भाषाओं का मोह त्याग स्वदेशी और अपनी में मातृभाषा के विकास पर ध्यान देना चाहिए। मातृभाषा बोलने और लिखने से ही अपनी भाषा समृद्ध होगी। हम नेपाल में अपनी मातृभाषा अवधी, देश की भाषा नेपाली और विश्व भाषा हिंदी के लिए कार्य करते आए हैं। "
__________________________________
0 टिप्पणियाँ