13-14 की रात्रि में शारदा सहायक 49 खंड की गुन्नौर माइनर कटने से जलमग्न हुई फसल ,किसानों की सूचना पर पहुंची थी डायल 112 ।
बीती रात पुनः टूटी माइनर की पटरी ,दर्जनों बीघा गेहूं की फसल जलमग्न,गुन्नौर गांव में घुसा पानी।
सोशल मीडिया ट्विटर किसानों के मोबाइल पर वार्ता के माध्यम से सूचना के बावजूद के कई घंटे बाद जगा प्रशासन।
एसडीएम ने किया स्थलीय निरीक्षण,एक्शईन और जेई ने पहुंचकर नहर का पानी बंद कराया ।
किसानों के फसल की बर्बादी का जिम्मेदार कौन,क्या किसानों को मिलेगी क्षति पूर्ति।
मुसाफिरखाना अमेठी । कोतवाली मुसाफिरखाना के अंतर्गत तमाम किसानों की फसल गुन्नौर के आसपास अचानक नहर काटने से जलमग्न हो गई और किसानों आम जनता की जल भराव समस्या पैदा हो गई सूचना के कई घंटे बाद उप जिलाधिकारी मुसाफिरखाना प्रीति तिवारी मौके पर पहुंचकर स्थल का जायजा किया और अधिकारियों को निर्देशित किया।मुसाफिरखाना अमेठी।
कोतवाली क्षेत्र के गुन्नौर गाँव के पास बीती रात नहर की पटरी कटने से लगभग पक्का 10 वीघा खेत पूरी तरह से जलमग्न हो गया। 
प्राप्त जानकारी के अनुसार 13-14 दिसंबर की रात्रि में किसान सिद्ध नाथ पासी ने अपने खेत की सिंचाई के लिए नहर की पटरी काटकर पानी ले जा रहे थे। तेज बहाव के कारण आस पास के किसानों सिद्ध नाथ पासी, रामकुमार, लाल बाबू, दुख छोर आशीष तिवारी एवं सतीश तिवारी का लगभग पक्का10 वीघा खेत पूरी तरह से जल मग्न हो गया जिससे किसानों का काफी नुकसान हो गया। स्थानीय लोगों की सूचना पर पहुँची डायल 112 ने ग्रामीणों की सहायता से नहर की पटरी बंधवाया।किन्तु बाद में फिर से नहर की पटरी कटने से गुन्नौर गाँव में दर्जनों घरों में पानी घुस गया।
शारदा सहायक खंड 49 सुल्तानपुर की नहर से अचानक पानी छोड़ा गया जिस खेत और गांव पानी से लबालब हो गए ग्रामीणों किसानों ने इसकी सोशल मीडिया ट्विटर आदि विभिन्न माध्यम से जिले के आलाधिकारी को दिया । कई घंटे बाद प्रशासन हरकत में आया ।
प्रशासन के आदेश के क्रम देर से ही सही 49 खंड के अधिशासी अभियंता अमित कुमार चौधरी अपनी टीम के साथ गुन्नौर पहुंचे और मौके 49 खंड के अवर अभियंता संदीप श्रीवास्तव की निगरानी में तत्काल आम नागरिकों को राहत देते हुए जेसीबी लेकर शारदा सहायक 49 की नहर को तत्काल बंद कर कर नहर को बंधवा दिया दिया है तब जाकर आम जनता ने राहत की सांस ली है वैसे तमाम किसानों की काफी फसल बर्बाद हो गई लेकिन विभाग की सक्रियता के चलते लोगों को कुछ राहत मिल गई है वैसे लोगों ने नुकसान की भरपाई के लिए विभागीय मुआवजे की मांग किया। आखिरकार क्षेत्रीय किसानों का काफी नुकसान हुआ है। इसके लिए प्रशासन किसको जिम्मेदार ठहराएगा। प्रश्न यह है कि क्या किसानों के नुकसान की भरपाई विभाग करेगा या फिर प्रशासन देगा क्षति पूर्ति यह भविष्य के गर्भ में है।
समय से जागता विभाग तो शायद फसल नहीं होती बर्बाद।
नहर की पटरी के कटाव और फसल के जलमग्न होने की सूचना पर प्रशासन और नगर विभाग तुरंत कार्यवाही अमल में लाया होता तो न तो व्यापक स्तर फसल जलमग्न होती और न ही गुन्नौर गांव के दर्जनों घरों में पानी घुसता। नहर की पटरी कटने की सूचना के 24 घंटे बाद स्थानीय प्रशासन का मौके पर पहुंचना ,कार्यवाही के निर्देश देना उसके बाद नहर बंद कर बांधना । इस प्रकरण में कही न कही स्थानीय प्रशासन एवं नगर विभाग की घोर लापरवाही देखने को मिली है।
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