सरस काव्य गोष्ठी संपन्न

सरस काव्य गोष्ठी संपन्न।


अक्षय मेल समाचार लखनऊ।
वरिष्ठ साहित्यकार गीतकार घनानंद पांडेय मेघ के पंत नगर लखनऊ आवास पर काव्य गोष्ठी आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता घनानंद पांडेय मेघ द्वारा की गई। मुख्य अतिथि डॉक्टर कुसुम चौधरी थीं तथा कुशल संचालन राम राज भारती फतेहपुरी विद्यावाचस्पति ने किया। 
कार्यक्रम का आरंभ राम राज भारती फतेहपुरी की वाणी वंदना से हुआ। इस अवसर पर घनानंद पांडेय मेघ, डॉक्टर कुसुम चौधरी,  राम राज भारती फतेहपुरी, मनमोहन बाराकोटी तमाचा लखनवी, अनिल कुमार सिंह जयसवार, अमर वर्मा एवं अन्य कई कवियों ने अपना सरस काव्यपाठ प्रस्तुत किया, जिसकी श्रोताओं ने खूब सराहना की।
काव्यपाठ की पंक्तियां अधोलिखित हैं।
वरिष्ठ साहित्यकार गीतकार घनानंद मेघ ने मां वाणी के चरणों में गीत "मां सतपंथ दिखा देना। पूजन भजन विधा न जानूं, भक्ति की युक्ति सिखा देना।"  पढ़ा तथा एक सुंदर सश्वर पर्वतीय लोकगीत सुनाकर सबका मन मोह लिया।
डॉक्टर कुसुम चौधरी ने दो मधुर गीत पढ़े।  पहला गीत आपसी सौहार्द पर आधारित 
"आओ प्यार का दीप जलाएं, खुशियों के त्योहार मनाएं" दूसरा गीत उन्होंने सामाजिक सरोकार नारी विमर्श पर केंद्रित "नारी तेरी गजब कहानी, कितनी पीड़ा सहती है, गम के प्याले हरदम पीती, नहीं किसी से कहती है।"  पढ़कर वाहवाही बटोरी तथा गंभीर चिंतन करने को विवश किया।

राम राज भारती फतेहपुरी ने जनपद विशेष पर अपनी कविता " गंग यमुन बीच फतेहपुर जिला एक, राष्ट्र हेतु रखा सदा, तिरंगे का मान है" और भोलेनाथ शिव पर एक सारगर्भित छंद "संग में रखें त्रिशूल, हरते हैं तीन शूल, जय बोलते ही होता, जग में अमन है" पढ़कर सराहना पाई। मनमोहन बाराकोटी तमाचा लखनवी ने हास्य व्यंग के दोहो से सबको खूब हंसाया। बानगी के लिए उनका एक दोहा " आता जाता कुछ नहीं, बनते ठेकेदार।उनसे अच्छे तो मियां, अपने चौकीदार।" 
   अनिल जायसवार ने एक सुंदर गीत " किसी की आंख का तारा, हमें भी लोग हैं कहते" का सश्वर पाठ किया।
        अंत में राम राज भारती ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए अगले आयोजन तक कार्यक्रम के स्थगन  की घोषणा की।
रिपोर्ट - पण्डित बेअदब लखनवी

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