उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार एवं माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जौनपुर एम0पी0 सिंह के कुशल निर्देशन से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्ववाधान में बन्दियों को विधिक जानकारी प्रदान कराने हेतु सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जौनपुर श्रीमती शिवानी रावत की अध्यक्षता में 29 अक्टूबर 2021 को अपरान्ह् 12ः30 बजे वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला कारागार, जौनपुर का वर्चुअल निरीक्षण एवं विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।
निरीक्षण में डिप्टी जेलर द्वारा बताया गया कि जिला कारागार में कुल 1184 बन्दी है जिसमे 1124 पुरूष तथा 60 महिला बन्दी है, जेल अस्पताल में 26 बन्दी हैं, कोई भी गम्भीर रूप से बीमार नहीं है। वैक्सीनेशन के सम्बन्ध में बताया गया कि 1015 बन्दियों को वैक्सीन की दोनों डोज दी जा चुकी है। किशोर बैरक में 52 बन्दी है इन सभी बन्दियों को वैक्सीन की डोज दी जा चुकी है। महिला बन्दियों गीता चौहान, पूनम गुप्ता, कंचन आदि से वार्ता कर समस्याओं के बारे में पूॅछे जाने पर कोई समस्या नही होना बताया गया। उनके साथ रह रहे बच्चों के नाश्ता, भोजन, पढ़ाई आदि की उपलब्धता के सम्बन्ध में पॅूंछे जाने पर महिला बन्दियों द्वारा बताया गया कि बच्चों को समय से नाश्ता एवं भोजन उपलब्ध कराया जाता है किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं है।
सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती शिवानी रावत द्वारा नालसा की योजनाओं के बारे में जानकारी प्रदान कराते हुए बताया गया कि ऐसे गरीब, असहाय वर्ग के बन्दी जो धन के अभाव में अपने वादों की पैरवी हेतु वकील कर पाने में असमर्थ हो वह जेल में स्थापित लीगल एड क्लीनिक अथवा कारागार अधीक्षक के माध्यम से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जौनपुर में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर निःशुल्क अधिवक्ता प्राप्त कर सकते हैं। सजा पाये बन्दियों को समय से पूर्व रिहाई की जानकारी दी गयी, डिप्टी जेलर द्वारा बताया गया शासन द्वारा नियम संशोधित हो जाने के कारण समय पूर्व रिहाई के पात्र बन्दी नहीं हैं। सचिव द्वारा गिरफ्तार व्यक्तियों के अधिकारों के बारे में बताया गया कि पुलिस द्वारा गिरफ्तार करने की स्थिति में गिरफ्तारी के कारण की सूचना देना तथा जमानतीय प्रकृति के आरोप में पुलिस द्वारा तत्काल जामानत का प्रावधान व गैर-जमानतीय प्रकृति के आरोप में 24 घण्टे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य है तथा गिरफ्तारी या निरूद्ध करने की सूचना आपके परिवारजन या निकटतम मित्र को लिखित में देना आवश्यक है। हिरासत के दौरान आपकी पसन्द के अधिवक्ता से विधिक राय हेतु मिलने या सलाह का अधिकार व गिरफ्तारी के पश्चात चिकित्सीय परीक्षण करवाने का अधिकार प्राप्त है।
सचिव द्वारा बताया गया कि जेल में निरूद्ध बन्दियों के परिजन जेल प्रशासन को 72 घण्टे के अंदर आरटीपीसी आर जॉंच रिपोर्ट दिखाकर जेल में निरूद्ध अपने परिजन बन्दी से मुलाकात कर सकेगे। सचिव द्वारा बन्दियों हेतु योगा सत्र के आयोजन तथा डेंगू जैसे रोग से बचाव हेतु बैरक व परिसर में फागिंग कराये जाने हेतु निर्देशित किया गया।
निरीक्षण में डिप्टी जेलर द्वारा बताया गया कि जिला कारागार में कुल 1184 बन्दी है जिसमे 1124 पुरूष तथा 60 महिला बन्दी है, जेल अस्पताल में 26 बन्दी हैं, कोई भी गम्भीर रूप से बीमार नहीं है। वैक्सीनेशन के सम्बन्ध में बताया गया कि 1015 बन्दियों को वैक्सीन की दोनों डोज दी जा चुकी है। किशोर बैरक में 52 बन्दी है इन सभी बन्दियों को वैक्सीन की डोज दी जा चुकी है। महिला बन्दियों गीता चौहान, पूनम गुप्ता, कंचन आदि से वार्ता कर समस्याओं के बारे में पूॅछे जाने पर कोई समस्या नही होना बताया गया। उनके साथ रह रहे बच्चों के नाश्ता, भोजन, पढ़ाई आदि की उपलब्धता के सम्बन्ध में पॅूंछे जाने पर महिला बन्दियों द्वारा बताया गया कि बच्चों को समय से नाश्ता एवं भोजन उपलब्ध कराया जाता है किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं है।
सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती शिवानी रावत द्वारा नालसा की योजनाओं के बारे में जानकारी प्रदान कराते हुए बताया गया कि ऐसे गरीब, असहाय वर्ग के बन्दी जो धन के अभाव में अपने वादों की पैरवी हेतु वकील कर पाने में असमर्थ हो वह जेल में स्थापित लीगल एड क्लीनिक अथवा कारागार अधीक्षक के माध्यम से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जौनपुर में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर निःशुल्क अधिवक्ता प्राप्त कर सकते हैं। सजा पाये बन्दियों को समय से पूर्व रिहाई की जानकारी दी गयी, डिप्टी जेलर द्वारा बताया गया शासन द्वारा नियम संशोधित हो जाने के कारण समय पूर्व रिहाई के पात्र बन्दी नहीं हैं। सचिव द्वारा गिरफ्तार व्यक्तियों के अधिकारों के बारे में बताया गया कि पुलिस द्वारा गिरफ्तार करने की स्थिति में गिरफ्तारी के कारण की सूचना देना तथा जमानतीय प्रकृति के आरोप में पुलिस द्वारा तत्काल जामानत का प्रावधान व गैर-जमानतीय प्रकृति के आरोप में 24 घण्टे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य है तथा गिरफ्तारी या निरूद्ध करने की सूचना आपके परिवारजन या निकटतम मित्र को लिखित में देना आवश्यक है। हिरासत के दौरान आपकी पसन्द के अधिवक्ता से विधिक राय हेतु मिलने या सलाह का अधिकार व गिरफ्तारी के पश्चात चिकित्सीय परीक्षण करवाने का अधिकार प्राप्त है।
सचिव द्वारा बताया गया कि जेल में निरूद्ध बन्दियों के परिजन जेल प्रशासन को 72 घण्टे के अंदर आरटीपीसी आर जॉंच रिपोर्ट दिखाकर जेल में निरूद्ध अपने परिजन बन्दी से मुलाकात कर सकेगे। सचिव द्वारा बन्दियों हेतु योगा सत्र के आयोजन तथा डेंगू जैसे रोग से बचाव हेतु बैरक व परिसर में फागिंग कराये जाने हेतु निर्देशित किया गया।
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