उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार एवं माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एम0पी0 सिंह के अनुमति से अनुसूचित जाति/जनजाति के बच्चों को कोविड-19 संक्रमण से बचाव एवं उ0प्र0 मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के विषय पर 06 सितम्बर 2021 को ‘‘मॉ बेलावती जूनियर हाईस्कूल सब्बेपुर जौनपुर’‘ में श्रीमती शिवानी रावत, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुरकी अध्यक्षता में विधिक साक्षरता/जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।

वीरेन्द्र कुमार यादव अक्षय मेल समाचार जौनपुर 
               सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती शिवानी रावत द्वारा शिविर को सम्बोधित करते हुए उपस्थित समस्त बच्चों को उनके अधिकारों के बारे में बताया गया कि 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा प्रदान किया जाना बच्चों का मौलिक अधिकार है। बच्चों की उपेक्षा, शोषण, उत्पीड़न, हिंसा, बालश्रम आदि से राज्य द्वारा संरक्षण प्रदान किये जाने का अधिकार है। बच्चों को अपने शोषण का विरोध करने का अधिकार है। भारतीय कानून में बाल विवाह गैर कानूनी है, विवाह के लिए लडकों की उम्र 21 वर्ष तथा लड़कियों की 18 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए, बच्चों के साथ किसी प्रकार का दुराचार व अपमानजनक बर्ताव कानूनी अपराध है। बच्चों की लैंगिंक अपराधों से सुरक्षा के लिए लागू ‘‘लैंगिंक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012’’के बारे में बताया गया। जिसमें बालकों के साथ लैंगिंक अपराध किये जाने पर कड़ी सजा के प्रावधान है। इस अधिनियम में 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों को बालक माना गया है। अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के बारे बताते हुए कहा गया कि इस वर्ग के नागरिकों का जबरदस्ती शोषण, उत्पीड़न, हिंसा, श्रम आदिके निवारण हेतु प्रत्येक जनपद में स्थापित विशेष न्यायालय के बारे में बताया गया।
वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के उपायों यथा मास्क का प्रयोग, उचित सामाजिक दूरी, साफ-सफाई एवं नियमित अंतराल पर सेनीटाइजर का प्रयोग अथवा साबुन से हाथ धोने, भीड़ से दूर रहने सम्बन्धी जानकारी प्रदान की गयी। शिविर में उपस्थित नागरिकों को मौलिक अधिकारों की शपथ भी दिलायी गयी।
                         ‘‘उ0प्र0 मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना 2021’’ के बारे में बताते हुए कहा गया कि कोविड-19 में 0 से 18 वर्ष तक की आयु जो बच्चें जिनके माता-पिता दोनों, माता या पिता में से किसी एक की अथवा वैध अभिभावकों की मृत्यु 1 मार्च 2020 के पश्चात हुई है। ऐसे बच्चों का जीवन संवारने के लिये इस योजना का शुभारम्भ किया गया है। इस योजना के अर्न्तगत कक्षा 12 तक शिक्षा पूर्ण करने के उपरांत महाविद्यालय, विश्वविद्यालय अथवा तकनीकी संस्थान से स्नातक डिग्री या डिप्लोमा तक की शिक्षा की व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा की जायेगी। इस सम्बन्ध में सहायता हेतु निर्धारित प्रारूप आवेदन पूर्णरूप से भर कर ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम विकास पंचायत अधिकारी, खण्ड विकास अधिकारी या जिला प्रोबेशन अधिकारी के कार्यालय में जमा किये जायेगे, जिसे जिला बाल संरक्षण ईकाई व बाल कल्याण समिति द्वारा चिन्हांकन कर 15 दिन के अन्दर आवेदन प्रक्रिया पूर्ण करायी जायेगी।
इस अवसर पर सचिव द्वारा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की योजना (बच्चों को मैत्रीपूर्ण विधिक सेवाएॅं, उनके संरक्षण के लिए विधिक सेवाएॅं) योजना-2015 के विषय पर बोलते हुए यह कहा गया कि हमारा दायित्व है कि प्रत्येक बच्चे के लिये विधिक सेवा सहित सभी अवसर उपलब्ध हों, जिससे उनके व्यक्तित्व का समग्र विकास हो तथा उनकी बौद्धिक, शारीरिक, मानसिक व अध्यात्मिक क्षमता का भी विकास हो।
पैनल अधिवक्ता श्री देवेन्द्र कुमार यादव द्वारा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की योजनाओं का जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा लोगों को प्रदान की जाने वाली विधिक सहायता के बारे बताया गया।
इस अवसर पर राम लौटन यादव, प्रबन्धक, अघ्यापकगण सुरेन्द्र, रंजीत, संतोश, राहुल, अमृता यादव तथा ग्राम प्रधान राजीव यादव एवं बच्चे एवं ग्रामीण नागरिक उपस्थित रहे। शिविर का संचालन अखिलेश यादव द्वारा किया गया।

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