कोरोना की जांच के लिए 766 मरीज चिह्नित किए गए
जिले में संचारी रोग नियंत्रण अभियान के अंतर्गत संचालित किए जा रहे दस्तक अभियान की आठ दिनों की उपलब्धियां सामने आईं हैं। इसके तहत आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने 02.71 लाख से ज्यादा घरों का भ्रमण किया। इन घरों में 1728 बुखार पीड़ित मरीज पाए गए। 91 लोगों की मलेरिया की स्लाइड बनाई गई और 766 लोगों को कोरोना की जांच के लिए चिह्नित किया गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ राकेश कुमार ने बताया कि दस्तक अभियान के तहत आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को फ्रंटलाइन वर्कर के रूप में परिभाषित किया गया है। उन्हें प्रत्येक दिन 15 घरों का भ्रमण कर कुल 15 दिनों में अपने क्षेत्र का भ्रमण पूरा कर लेना है। इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण दिया गया है। आशा कार्यकर्ताओं को कार्य योजना के तहत कार्य करना है।
वेक्टर बार्न डिजीज के नोडल अधिकारी व एसीएमओ डॉ एसपी मिश्रा ने बताया कि दस्तक अभियान के तहत आशा कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर कुल नौ बिन्दुओं पर सूचना एकत्रित करनी है। सर्वे से मिली रिपोर्टों के आधार पर संबंधित नोडल अधिकारी लक्षणयुक्त रोगियों के निदान/उपचार/प्रबंधन की व्यवस्था कर रहे हैं। दस्तक अभियान के अंतर्गत मलेरिया बुखार, टीबी के लक्षण के रोगी, कोरोना के लक्षण के रोगी, जन्म पंजीकरण से छूटे बच्चे, मृत्यु पंजीकरण से छूटे लोग, ऐसे लोग जिन्हें आयरन फोलिक एसिड की आवश्यकता हो, फाइलेरिया डीफार्मेटी के रोगी, आयुष्मान भारत योजना के लाभ से वंचित, घर में जलश्रोतों की संख्या एवं उनके विनष्टीकरण की जानकारी एकत्रित की जा रही है।
जिला मलेरिया अधिकारी भानु प्रताप सिंह ने बताया कि दस्तक अभियान 10 मार्च से चल रहा है। अभी तक आठ कार्य दिवसों (10 से 17 मार्च) के जनपद के आंकड़े एकत्रित हुए हैं। इसके तहत 8094 बच्चों के जन्म और 825 लोगों की मृत्यु का पंजीकरण किया गया। 16 से 19 साल के 83,373 लोगों को फोलिक एसिड की टैबलेट दी गई। 964 लोग ऐसे चिह्नित किए गए जिनके हाथ-पैर में फाइलेरिया की वजह से सूजन थी। आयुष्मान भारत का आयुष्मान कार्ड बनाने से छूटे 10,056 लोग मिले। 544 कुपोषित बच्चे मिले। घरों के पास 16,828 पानी के श्रोतों की पहचान की गई। इसमें से 14,477 जलश्रोतों को समाप्त किया गया।
छह दिनों में 514 लोगों की हुई जांच, दो उपचाराधीन
पहली बार दस्तक अभियान के तहत घर-घर टीबी मरीज ढूंढे जा रहे हैं । अभियान के तहत 18 मार्च तक जिले मे 514 टीबी के संभावित लक्षण वाले व्यक्ति पाए गए जिसमें से नौ लोगों के बलगम की जांच हुई। इसमें से दो लोग उपचाराधीन हुए |
जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ राकेश कुमार सिंह ने बताया कि इस बार दस्तक अभियान के दौरान लक्षणों के आधार पर आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संभावित टीबी रोगियों का पता लगा रहीं हैं और जहां भी संभावित रोगी मिलेंगे वहां स्टीकर लगाया जा रहा है।
क्षय उन्मूलन अभियान के जिला कार्यक्रम समन्वयक सलिल यादव ने बताया कि जनवरी 2021 से अब तक कुल 1352 टीबी रोगी नोटिफाइड किये जा चुके हैं। इसमें से 858 सरकारी अस्पतालों तथा 504 प्राइवेट अस्पतालों के मरीज हैं। साथ ही इस वर्ष अब तक कुल 165 बच्चे टीबी रोग से ग्रसित मिले | पिछले वर्ष जनवरी 2020 से दिसम्बर 2020 तक कुल 6199 टीबी रोगी मिले थे | वर्ष 2019 से 2021 तक 1528 बाल टीबी रोगी मिले जिनमें से 425 बाल टीबी रोगियों को गोद लिया गया । जिले में वर्ष 2017 से अब तक 14572 टीबी रोगियों को निःक्षय पोषण योजना के तहत 500 रुपये प्रति माह के हिसाब से लगभग 3,91,51,000 रुपये का भुगतान किया गया है।

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