प्रकाश पर्व के लिए तैयार हो रहे मिट्टी के दिए पौराणिक महत्त्व से मिट्टी का दिया शुभ


दैनिक अक्षय मेल

चौमुखा दीपक जलाने से लक्ष्मी का आगमन ग्रहों का विनाश


शुकुल बाजार अमेठी। क्षेत्र में कुम्हारी कला आंशिक रूप से कायम है जहां लोग मोमबत्ती जलाकर प्रकाश पर्व मनाते हैं वहीं पर ग्राम शिवली में लंबू कुम्हार व पांडे गंज में भंगनु कसगर पूरे दूधोंरन मे लल्लू मिट्टी के छोटे व बड़े दीए चाक पर बनाते है जिसे ग्रामवासी पैसे व पुरानी प्रथा के अनुसार अनाज देकर खरीदते हैं अनाज देकर ग्रहणीया शुभ मानती हैं तथा कार्तिक अमावस्या के एक दिन पूर्व चतुर्दशी को हनुमान जयंती के रूप में भी ग्रहणी हनुमान जन्मोत्सव मनाती हैं तथा प्रकाशदीप चौमुखा करुआ तेल से जलाती हैं तथा इसी दिन लक्ष्मी की अधिष्ठाता तथा कुबेर सर्व से आगमन पृथ्वी पर होता है। जो पुराणों में वर्णित है तथा अनेक सिद्धियों का योग इसी दिन होता है इच्क्षणी के रूप में नवाई पिंडी कामरूप आसाम स्थापित है। जहां से लोग अपनी अनेक सिद्धियों की सिद्धि प्राप्त करते हैं वहां से रतन पंडा के अनुसार मां सिद्धिदात्री अखंड पीठ समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली कार्तिक मास की अमावस्या को यहां आने वाले श्रद्धालुओं की आफत मुश्किलें मात्र दर्शन से ही दूर कर देती हैं। यह त्यौहार मानव जीवन के लिए पौराणिक स्रोत के अनुसार ब्रह्म वृक्ष पीपल के पेड़ के नीचे मिट्टी के दिए चौमुखा जलाने से जन कल्याण राष्ट्र कल्याण एवं अकाल मृत्यु का भय नहीं होता है। क्योंकि इसी दिन मृत्यु मां के केशव का सिंगार करती है। और मां के आदेश के विरुद्ध ऐसा कृत नहीं कर सकती जो जन समाज के लिए घातक हो क्योंकि हनुमान जी स्वयं अपने पंच भ्राता के साथ मां के पहरेदारी के रूप में विराजमान रहते हैं इससे यह अति महत्वपूर्ण पर्व है।

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