पुत्र की दीर्घायु होने की कामना के लिए माताए 36 घण्टा निर्जला व्रत रही
अक्षय मेल समाचार
मनीष कुमार यादव
मेंहनगर (आज़मगढ़ ) स्थानीय तहसील क्षेत्र भारतीय संस्कृति में धर्म की प्रधानता है। पर्व-त्योहार मनाने एवं व्रत रखने की परंपरा है। इसी कड़ी में एक जिउातिया व्रत है। इसे जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है। पुत्र की लंबी दीर्घायु की कामना से माताएं यह व्रत करती हैं।
जिउतिया व्रत अश्विनी माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इसकी शुरूआत इस वर्ष सप्तमी तिथि 9 सितंबर को नहाय-खाय से शुरू होता है। इसी दिन रात से अष्टमी शुरू होने के साथ निर्जला व्रत शुरू होता है। 10 सितंबर की अष्टमी है। 11 सितंबर को जिउतिया व्रत का पारण नवमी तिथी को किया जाता है,इसलिए कुल मिलाकर यह व्रत 36 घंटे का करीब होता है।
व्रत की कथा: हर व्रत की तरह जिउतिया व्रत की भी कथा है। मान्यता के अनुसार जब पुत्र पर आया बड़ा संकट टल जाता है तो लोग यही कहते है कि आपकी माता खर जिउतिया का व्रत रखी थी। महाभारत काल से ही इस व्रत की परंपरा चली आ रही है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी शक्ति से उत्तरा के गर्भ में मरे संतान को जीवित कर दिया। गर्भ में मरकर जीवित होने के कारण उस बच्चे का नाम जीवित्पुत्रिका पड़ा। तब से ही माताएं अपने पुत्रों की रक्षा एवं लंबी उम्र की कामना को लेकर जिउतिया व्रत करती हैं। जिउतिया को लेकर बाजार में चहल-पहल शुरू रही। इस वाबत एसडीएम मेंहनगर प्रियंका प्रियदर्शिनी ने शाम को कस्बा सहित ग्रामीण इलाकों में चिन्हित स्थानों पर लगने वाले गोठ को देखा ,व्रत रखी सभी महिलाओं को शुभकामनाएं दी साथ ही क्षेत्र में भ्रमण करती रही।
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