दयानंद बछरावां पी जी कॉलेज के तत्वावधान में कोविड-19 के ध्यान रखते हुए हिंदी पखवाड़े के तहत मनाया गया हिंदी दिवस

दयानंद बछरावां पी जी कॉलेज  के तत्वावधान में कोविड-19 के ध्यान रखते हुए हिंदी पखवाड़े के तहत मनाया गया हिंदी दिवस

नीलम ब्यूरो दैनिक अक्षय मेल समाचारपत्र

बछरावां रायबरेली -- कोविड-19 महामारी के बीच यह पहला अवसर है जब भारत में ही नहीं सारे विश्व में हिंदी दिवस सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मनाया जा रहा है, ऐसे में हिंदी विभाग, दयानंद बछरावां पी जी कॉलेज, बछरावां के तत्वावधान में भी कोविड-19 के नियमों को ध्यान रखते हुए हिंदी पखवाड़े के तहत हिंदी दिवस मनाया गया। इस अवसर पर विभाग द्वारा 'हिंदी के बढ़ते चरण' विषयक एक विभागीय संगोष्ठी भी आयोजित की गई जिसमें हिंदी के वैश्विक परिदृश्य, सोशल मीडिया में हिंदी की भूमिका तथा तकनीकी, चिकित्सकीय और विधि के क्षेत्र में हिंदी के बढ़ते प्रयोग, संपर्क भाषा के रूप में उसकी उपयोगिता आदि पर व्यापक चर्चा की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर सुभाष चंद्र श्रीवास्तव ने की। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि हिंदी ज्ञान का महा समुद्र है, राष्ट्र की आत्मा है असीम संभावनाओं का क्षितिज है। भूमंडलीकरण एवं बाजारीकरण के दौर में हिंदी अपनी उपयोगिता सिद्ध कर रही है। यदि हिंदी चिंतन एवं अनुसंधान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भाषा बन जाए तो विश्व की सर्वोत्तम भाषा के समकक्ष होगी ।  अवसर पर डॉ० जितेंद्र मिश्र ने कहा कि यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि हिंदी आज विश्व में पहले पायदान पर पहुंचकर समूचे विश्व में भारत की पहचान को मजबूत बना रही है। तकनीकी प्रौद्योगिकी चिकित्सा और विधि के अध्ययन अध्यापन तथा न्यायालय तक में उसका प्रयोग बढ रहा है। यह बात अलग है कि वह अपनों के बीच में ही राजनीतिक दुराग्रह का शिकार हो रही है। अवसर पर डा० विनय सिंह ने हिंदी के महत्व को रेखांकित करते हुए उसे कार्य व्यवहार की भाषा कहा। डा० एकता हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए सोशल मीडिया को उपयोगी बताया उनके अनुसार सोशल मीडिया के कारण ही देश विदेश में हिंदी का प्रयोग करने वालों की संख्या बढ़ी है। डॉ० अनीता पाल ने 'जन-जन को जो मिलाती है, हिंदी कहलाती है' कहकर उसे संपर्क भाषा के लिए महत्वपूर्ण बताया। इस अवसर पर अपने उद्गार व्यक्त करते हुए डॉ० ज्योति श्रीवास्तव ने कहा कि हिंदी दिवस मनाने का उद्देश्य हिंदी के विकास का मंथन करना है। डॉ०श्रीप्रकाश के कहा कि हिंदी वैश्विक एकता और अखंडता की परिचायक है। 
     कार्यक्रम का संचालन डा० जितेन्द्र मिश्र ने किया।इस अवसर पर डा० पूर्णेश्वरी द्विवेदी, डा० विष्णु चन्द्र श्रीवास्तव, डा०संदीप सिंह,डा० मालती सिंह सहित महाविद्यालय के अन्य विभागों के शिक्षक भी उपस्थित रहे।

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