लोकतंत्र का गला घोंट चल रही है योगी सरकार, संवैधानिक मूल्यों को सरकार ने किया तार- तार :
कमल सिंह चौहान
दैनिक अक्षय मेल समाचारपत्र रायबरेली रिपोर्ट नीलम
रायबरेली - राष्ट्रीय संकट महामारी के समय जनपद में जनता की मदद की बजाए जनता के कष्ट बढ़ाने का कार्य ज्यादा हुए है। यह आरोप लगाते हुए काँग्रेसी नेता कमल सिंह चौहान ने बताया कि बाराबंकी में मार्च माह में 3219 वाहनों का चालान किया गया। अप्रैल माह में 6398 वाहनों का चालान व 36 वाहनों को सीज किया गया और जब जनता का संकट और बढ़ा तो मई माह में 8135 वाहनों का चालान व 61 वाहनों को सीज कर दिया गया। वही महामारी अधिनियत के तहत 160 केस दर्ज कर 180 लोगों को गिरफ्तार किया गया, हद तो यहां तक हो गई कि नारकोटिक्स ड्रग एण्साइकोट्राॅपिक सब्स्टांसेस एक्ट का निरोधक कानूनन मानकर फर्जी बरामदगी दिखाकर मार्च में 14 अप्रैल 4, और मई में 32 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
जनपद का बहुचर्चित केस बांसा निवासी नसरूद्दीन का है। जिनको मसौली पुलिस घर से बुलाकर 150 ग्राम मार्फीन के साथ दिखाकर जेल भेज दिया गया जिस पर भाजपा के कई सांसद व विधायकों ने मुख्यमंत्री व पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर जांच की मांग की है। वही नाबालिग छात्र मो0 जुनेद को बाराबंकी से पकड़कर जैदपुर से अवैध रूप से निरूद्ध रखा गया है और 300 ग्राम मार्फीन दिखाकर चालान कर दिया गया जुनेद का बाप ने प्रार्थना-पत्र देकर मांग की थी कि गिरफ्तारी टीम में शामिल लोगों के मोबाइल लोकेशन चेक किये जाये जिससे घटना फर्जी होगी। वही मसौली के ही बांसा निवासी फतेहखान को भी घर से बुलाकर 300 ग्राम मार्फीन दिखाकर जेल भेज दिया था उसकी मां ने भी मुख्यमंत्री को प्रार्थना-पत्र देकर विशेष जांच की मांग की थी।
श्री चौहान ने मांग की कि माननीय उच्चतम न्यायालय ने प्रवासी मजदूरों के सभी वाद समाप्त कर दिये हैं। उसी तरह राष्ट्रीय संकट महामारी के समय महामारी अधिनियम व मोटर वाहन अधिनियम के सभी मुकदमें समाप्त किये जाये और चालान करना बंद किया जाये। एन0डी0पी0एस0 एक्ट में के तहत निरूद्ध किये गये लोगों की एक विशेष जांच कटी बनाकर साक्ष्य व सबूत लेकर सभी वाद समाप्त किये जाये तथा दोषी पुलिस कर्मचारियों पर वाद दर्ज कर मार्फीन कहां से लाकर दिखाया है की भी जांच की जाये अन्यथा काँग्रेस पार्टी को मजबूर होकर आन्दोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ेगा। कमल सिंह चौहान ने आगे कहा कि लोक कल्याणकारी राज्य में इस तरह की कार्यवाहियां लोकतंत्र को शर्मिन्दा करती हैं।

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