रायबरेली ।। एक तरफ वैश्विक महामारी के बीच में चिकित्सा विभाग के सभी कर्मचारियों का पूरा देश योद्धा के नाम से सम्मानित कर रहा है । वही रायबरेली जिला महिला चिकित्सालय अपनी बेहूदा हरकतों से इस संकट की घड़ी में भी सहयोग नहीं प्रदान कर रहा है। बल्कि अस्पताल ने इससे महामारी का लाभ उठाते हुए लूट खसोट और मरीजों से धन उगाही का कार्य और भी तेज कर दिया है। यही नहीं जब मरीजों के पास उन्हें देने के लिए सामान्य रूप से आर्थिक धन नहीं होता है तो अस्पताल में मरीजों की खैर नहीं है। आपको बता दे कि सुनीता पत्नी राजू ग्राम लखनापुर पोस्ट सरेनी को रक्त स्राव होने के कारण महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों ने बताया कि जो नर्स 2 बजे दिन में ड्यूटी पर आती है वो हर समय हम पर चिल्लाया करती थी और कहती थी कि जल्दी बेड खाली करो यह तुम्हारा घर नही है , क्या तुम यहाँ कोरोना फैलाने आयी हो और बहुत ही बत्तमीजी के साथ मरीज व परिजनों से बात करती थी । परिजनों का कहना है मरीज को लगातार रक्तस्राव की शिकायत हो रही थी लेकिन उपस्थित चिकित्सक ने उसे स्वस्थ बता कर छुट्टी दे दी। सबसे बड़ी बात इस लॉक डाउन में छुट्टी देने के बाद मरीज को घर जाने के लिये एम्बुलेंस भी नही दिया और मरीज रक्त स्राव की हालत में लगातार 5 घंटे सड़क पर पड़ी रही । मरीज ठीक न होने के बाद भी छुट्टी की बात पर जब परिजनों ने लगातार 5 घंटे नारजगी जाहिर की तब जाकर एक बार फिर पीड़िता को दोबारा भर्ती किया गया। इसके बाद अस्पताल के कर्मचारियों ने देर रात में परिजनों से इस बात को लेकर फार्म में हस्ताक्षर कराने लगे कि आपके मरीज की हालत काफी ज्यादा गंभीर है और जान का खतरा है । जिस पर मरीज के परिजनों ने कारण पूछा कि अभी जब आपने कुछ घंटों पहले छुट्टी दिया था तो मरीज ठीक था और जब दोबारा भर्ती किया तो मरीज की हालत इतनी ज्यादा कैसे गम्भीर हो सकती है कि जान का खतरा हो गया । अस्पताल की इस हरकत से मरीज और उसके परिजन भी हक्के बक्के रह गए कि जहां एक समय पहले चिकित्सक मरीज को स्वस्थ बताकर दवाओं से ही ठीक हो जाने की परामर्श देकर छुट्टी कर दिया था । वहीं अब उसकी हालत को गंभीर औऱ जान का खतरा बताने लगे। मजबूरन मरीज को लेकर परिजन दूसरे अस्पताल चले गए । यहां यह भी बताते चलें कि इस हंगामे के दौरान अस्पताल चौकी प्रभारी भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने मरीज के परिजनों को आश्वासन भी दिया था कि मरीज का समुचित इलाज किया जाएगा । बताते हैं कि अस्पताल प्रशासन की इस अमाननीय कृत्य के कारण देर रात में ही मरीज व उसके परिजन अस्पताल छोड़ कर चले गए । कहने को तो अस्पताल समस्त सुविधाओं से युक्त बताया जाता है परंतु अस्पताल के अंदर मरीजों और उनके परिजनों के साथ किस तरह का व्यवहार किया जाता है । यह तो वही बता सकता है जिसका पाला इस अस्पताल के कर्मचारियों और यहां की व्यवस्था से पड़ा हो। देखने में बाहर से जितना ही चाक चौबंद अस्पताल लगता है उतना ही अस्पताल कर्मियों के चलते हैं भ्रष्टाचार की गंदगी कोने कोने पर दिखाई देती है।

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