कोरोना महामारी को लेकर डॉक्टर एनके श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आईएमए के डॉक्टरों संग की बैठक





नीलम ब्यूरो रायबरेली
 दैनिक अक्षय मेल समाचार पत्र

रायबरेली ।। कोविड-19 को विश्व स्वास्थ संगठन द्वारा वैश्विक महामारी घोषित किया जा चुका है । प्रधानमंत्री जी द्वारा 21 दिन का जो लाॅक डाउन किया गया है उसके चलते मजदूर, गरीब, दिहाड़ी मजदूर महानगरों से पलायन कर दिया है जो यह गंभीर समस्या उत्पन्न कर सकती हैं।  इसके बारे में किसी को भी पता नहीं कि कौन कोरोना वायरस से संक्रमित है । इसकी सारी जिम्मेदारी स्वास्थ्य महकमा पर छोड़ दिया गया है । स्वास्थ विभाग उस भयानक मंजर की रोकथाम के लिए लगातार बैठकें कर उसको रोकने का भरसक प्रयास जारी है ।

इसी कड़ी में आज मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर संजय कुमार शर्मा के दिशा निर्देशन में सीएमएस डॉक्टर एनके श्रीवास्तव ने आईएमए के डॉक्टर के साथ बैठक कर महामारी से लड़ने के लिए क्या-क्या तरीके होनी चाहिए सभी विषयों पर चर्चा किया । डॉक्टर एनके श्रीवास्तव ने कहा कि दुनिया भर के विशेषज्ञ एक स्वर में कह रहे हैं कि कोरोना कि अब तक कोई वैक्सीन नहीं बनी है और ना ही इसका इलाज है ।सोशल मीडिया को लेकर महाज्ञानी होकर बेतुका ज्ञान बांट रहे हैं । कोरोना वायरस स्वसन संबंधित रोग है और कोरोना वायरस को 75% अल्कोहल छिड़कने तथा उसे साफ करने से ही मारा जा सकता है । प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि देश को कोरोना की बड़े खतरे से बचने के लिए ऐसी अफवाहों से बचते हुए केवल सरकार तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का ही पालन किया जाए । 

इसी कड़ी में वरिष्ठ फिजीशियन डॉ बीरबल ने कहा कोरोना को लेकर सारे लोगों के मन में अभी भी भय व्याप्त है कि कोरोना का संक्रमण होने के पश्चात मौत निश्चित है लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है । अभी तक आंकड़े देखें तो कोरोना संक्रमण के बाद भी दुनिया भर में हजारों मरीज ठीक हो चुके हैं हाल ही में एम्स द्वारा मरीजों के लिए जारी जागरूकता दिशा निर्देश पुस्तिका का स्पष्ट किया गया कि कोरोना संक्रमित केवल 20% मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता पड़ती है जिसमें कुछ को गहन चिकित्सा निगरानी कक्ष में रखना पड़ता है जबकि 80 फ़ीसदी मरीज घर में आइसोलेशन में रहकर खुद ही ठीक हो जाते हैं । एम्स द्वारा जारी इस पुस्तक में बताया गया है कि लोगों को कोरोना को लेकर घबराने की नहीं बल्कि सतर्क रहने और भीड़-भाड़ से बचने तथा सरकार द्वारा जारी निर्देशों के अपनाने की जरूरत है । जिन मरीजों को उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, कैंसर जैसे रोग है उन्हें कोरोना का खतरा ज्यादा रहता है, ऐसे मरीज भीड़-भाड़ से बच्चे और बार-बार हाथ धोते रहे । अंत में डॉक्टर एनके श्रीवास्तव ने कहा यह कोरोना "रक्त बीज" की तरह है । हम सभी डॉक्टरों को मिलकर इस "रक्तबीज" का  एक भी बूंद धरती में नहीं पड़ने देंगे, तभी इस पर जीत हासिल कर सकते हैं । आओ हम सब मानवता के रक्षक मिलकर इस महामारी को जड़ से खत्म कर दें ।

इस मौके पर डॉ मनीष सिंह चौहान, डॉक्टर अनुपम दीक्षित, डॉ आशीष पांडे, डी दीप्ति मिश्रा, डॉ राहुल रस्तोगी, डॉ संजीव जायसवाल, डॉ मनीष त्रिवेदी, डॉ विकास द्विवेदी, डॉ आशीष पांडे, डॉक्टर सुधीर पांडे आदि आईएमए के पदाधिकारी उपस्थित थे।

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