खुले में शौच से मुक्त नहीं हो पाया विकासखंड
शुकुल बाजार अमेठी ।शौचालय का सच ग्राम सभा बख्तावर नगर ,सत्थिन, मोहद्दिन पुर , सहित शुकुल बाजार विकासखंड की कई ग्राम सभाएं आज तक खुले में शौच से मुक्त नहीं हो पाई वही शौचालय निर्माण में भी जमकर धांधली दिखाई दे रही है ।क्षेत्रवासियों का कहना है ज्यादातर शौचालय ठेकेदारी प्रथा से बनवाए गए जो मानकों को ताक पर रखकर बनाए गए घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई प्रधानमंत्री की स्वच्छ भारत खुले में शौच से मुक्त योजना। अधिकारियों कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत के चलते सरकारी धन का जमकर बंदरबांट किया गया क्षेत्र वासियों का कहना है खुले में शौच से मुक्त तो नहीं क्षेत्र हो पाया लेकिन जितने जमीन में शौचालय बना वह शौचालय भी इस्तेमाल का नहीं है और जमीन भी फस गई क्षेत्रवासियों का कहना है कि अगर यही पैसा सीधे लाभार्थी को मिलता तो थोड़ा बहुत लाभार्थी अपने पास से लगाकर अच्छे से तथा इस्तेमाल करने वाला शौचालय बना सकता था लेकिन विकासखंड की कई ग्राम सभा में ठेकेदारी प्रथा से शौचालय बनवाए गए जो शौचालय यूज़ लेस हैं तथा प्रधानमंत्री की आति महत्त्वपूर्ण योजना को भी ग्रहण लगा दिया गया ।प्रधानमंत्री ने बहन बेटियों की इज्जत को ध्यान में रखते हुए तथा बीमारियों से बचने के लिए शौचालय निर्माण पर भारी-भरकम धनराशि खर्च की लेकिन उसके बाद भी ना ही खुले में शौच से विकासखंड मुक्त हो पाया और ना ही योजना का सही ढंग से क्रिया उन्नयन किया गया जिसके चलते ज्यों की त्यों स्थित बनी हुई है और ऊपर से सरकारी खजाने पर भारी बोझ भी पड़ा क्षेत्रवासियों ने शासन-प्रशासन उच्च अधिकारियों से प्रधानमंत्री की महत्वपूर्ण योजना खुले में शौच से मुक्त भारत को सही से लागू करने की मांग की है तथा जिन लोगों के शौचालय अभी तक नहीं बने उन लोगों के शौचालय बनवाए जाने की मांग की है तथा जिन शौचालयों ने सरकारी धन का जमकर दुरुपयोग किया गया है उनकी जांच कराए जाने की तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कराए जाने की मांग की है तथा जो शौचालय जर्जर हैं टूट गए हैं गिर गए हैं उनका पुनः निर्माण या मरम्मत कराए जाने की मांग की है वहीं अधिकारियों ने कागज पर कई ग्राम सभाओं को ओडीएफ दिखा रखा है जबकि हकीकत इसके एकदम विपरीत दिखाई दे रही है क्षेत्र के अधिकांश लोगों को आज भी खुले में शौच के लिए ही जाना पड़ता है।
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