नीलम ब्यूरो रायबरेली दैनिक अक्षयमेल
स्वच्छता के अग्रदूत राष्ट्रीय संत गाडगे महाराज जी का 144 वां जन्मदिन डॉ भीमराव अंबेडकर बुद्ध विहार पंचशील नगर बालापुर रायबरेली में मनाया गया।
उनके जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए लखनऊ से पधारे प्रोफ़ेसर सुरेंद्र कुमार गौतम ने कहा कि संत गाडगे महाराज डॉ अंबेडकर के समकालीन थे । उन्होंने शिक्षा और स्वच्छता पर खूब काम किया । वे कहा करते थे कि अनपढ़ को शिक्षा दो , भूखे को भोजन दो, बीमार को दवाई दो , नंगे को कपड़ा दो और प्यासे को पानी दो, यही सबसे बड़ी सेवा और सबसे बड़ी पूजा है ।
सामाजिक चिंतक केपी राहुल ने संत गाडगे के जीवन पर अपने विचार रखते हुए कहा कि संत गाडगे बाबा ने 6 दिसंबर 1956 को बाबा साहब डॉ अंबेडकर के परिनिर्वाण के उपरांत अन्न जल त्याग दिये थे जिससे उनकी मृत्यु हो गयी थी।
संचालन करते हुए भारतीय बौद्ध महासभा के अध्यक्ष सुनील दत्त ने कहा कि संत गाडगे का जन्म 23 फरवरी 1876 को महाराष्ट्र के अंजनगांव में हुआ था। उनके पिता का नाम झींगराजी और माता का नाम सखूबाई था । वे जहां जाते थे साफ सफाई पर विशेष ध्यान देते थे । उनके इस कार्य से प्रभावित होकर महाराष्ट्र सरकार ने अमरावती विश्वविद्यालय का नाम संत गाडगे विश्वविद्यालय रखा है। भारत सरकार ने उनके नाम परडाक टिकट भी जारी किया है। उन्होंने दर्जनों शिक्षण संस्थाएं और अनाथ आश्रम खोले। लोगों की सेवा करते हुए अपना जीवन व्यतीत किया ।
इस अवसर कमलेश कुमार ,संतोष कुमार , अनिल कुमार सरोज , रामप्रसाद बौद्ध, एलएस बौद्ध, बुद्ध दीप सौरभ, गौरी शंकर, राजेंद्र कुमार चौधरी, एडवोकेट अशोक प्रताप मौर्य, अनिल कुमार मौर्य, छोटेलाल, एम एल लाल, समाकांत और भंते डॉ कमल सील , विवेकानंद आदि लोग उपस्थित रहे।
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