मुसाफिरखाना में योजनाओं की जानकारी को लेकर उठे सवाल, सीडीपीओ को नहीं पता खुद के कर्तव्य ।
अभय प्रताप यादव जिला ब्यूरो।
अक्षय मेल समाचार।
अमेठी। क्षेत्र में संचालित पोषण एवं आंगनबाड़ी योजनाओं को लेकर प्रशासनिक स्तर पर गंभीर लापरवाही सामने आई है। बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) सरिता सिंह को ही यह स्पष्ट नहीं है कि “हॉट कुक” एवं “कन्वर्जन कॉस्ट” की धनराशि किस अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराई जाती है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों और गर्भवती महिलाओं को दिए जाने वाले पोषण आहार में “हॉट कुक” (पका हुआ भोजन) और “कन्वर्जन कॉस्ट” (भोजन तैयार करने की लागत) महत्वपूर्ण घटक हैं। लेकिन जब संबंधित अधिकारी को ही इसकी जानकारी न हो, तो योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इस मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि जिम्मेदार अधिकारी ही अपने कार्यों और प्रक्रियाओं से अनभिज्ञ हैं, तो योजनाओं का लाभ सही तरीके से लाभार्थियों तक कैसे पहुंचेगा।
वहीं, इस संबंध में जब सीडीपीओ सरिता सिंह से बात की गई, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से यह बताने में असमर्थता जताई कि उक्त मद की धनराशि किस विभाग या अधिकारी द्वारा जारी की जाती है। स्थानीय प्रशासन से जुड़े जानकारों का मानना है कि इस प्रकार की अनभिज्ञता न केवल विभागीय समन्वय की कमी को दर्शाती है, बल्कि इससे योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी प्रश्नचिह्न लगता है। विश्वस्त सूत्रों की माने तो कई आंगनबाड़ी केंद्रों को सत्र 2025- 2026 का न तो विभाग द्वारा खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया और न ही कन्वर्जन कास्ट । सीडीपीओ के घोर लापरवाही/भ्रष्ट्राचार के कारण यदि बच्चों को मध्यान्ह भोजन नहीं उपलब्ध होता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। इस संबंध में जब डीपीओ एस के श्रीवास्तव के मोबाइल नंबर 94153 66695 पर वार्ता करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। अब देखना होगा कि संबंधित उच्च अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर स्थिति को स्पष्ट करते हैं या नहीं, और भविष्य में ऐसी लापरवाही पर क्या कार्रवाई की जाती है।
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