जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रदान करायी जाने वाली निःशुल्क विधिक सहायता की विस्तृत जानकारी प्रदान कराते हुए कोरोना संक्रमण से बचाव हेतु जेल परिसर एवं बैरको के सेनेटाईजेशन व नये आने वाले बन्दियों को अलग बैरक में आईसोलेट किये जाने हेतु जेल अधीक्षक को निर्देशित किया गया।

अक्षय मेल समाचार जौनपुर
उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार बन्दियों को विधिक जानकारी एवं कानूनी सहायता प्रदान कराये जाने हेतु सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जौनपुर श्रीमती शिवानी रावत की अध्यक्षता में बन्दियों को मध्यस्थता, वैकल्पिक विवाद निराकरण, कोविड-19 से बचाव व सावधानियों के बारे में जागरूक किये जाने हेतु जिला कारागार जौनपुर का 17 अगस्त 2021 को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से वर्चुअल निरीक्षण एवं विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।  
सचिव, श्रीमती शिवानी रावत, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रदान करायी जाने वाली   निःशुल्क विधिक सहायता की विस्तृत जानकारी प्रदान कराते हुए कोरोना संक्रमण से बचाव हेतु जेल परिसर एवं बैरको के सेनेटाईजेशन व नये आने वाले बन्दियों को अलग बैरक में आईसोलेट किये जाने हेतु जेल अधीक्षक को निर्देशित किया गया। उनके द्वारा बन्दियों को मीडियेशन, लोक अदालत व वैकल्पिक विवाद निराकरण के बारे में जानकारी प्रदान करायी गयी तथा 11 सितम्बर 2021 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में लघु अपराध से सम्बन्धित योग्य मामलों को चिन्हित कर निस्तारण हेतु प्रार्थना पत्र प्रेषित किये जाने व बन्दियों के परिजनों से मुलाकात कराये जाने, महिलाओं के साथ रह रहे बच्चों के खेल कूद, शिक्षा एवं समुचित आहार उपलब्ध कराये जाने हेतु निर्देशित किया गया। सचिव द्वारा बताया गया कि जेल में निरूद्ध बन्दियों के परिजन जेल प्रशासन को 72 घण्टे के अंदर आरटीपीसी आर जॉंच रिपोर्ट दिखाकर जेल में निरूद्ध अपने परिजन बन्दी से मुलाकात कर सकेगे।
                        सचिव, द्वारा बन्दियों को ‘‘प्ली बारगेनिंग’’ के बारे में बताते हुए कहा गया कि यह एक स्वैछिक प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया के तहत अपराधी अपने अपराध को स्वेच्छा से स्वीकार करता है। इससे न्यायालय द्वारा आरोपी पर लगी धाराओं को कम सजा में बदला जा सकता है। इसमें दोनों पक्षों के बीच होने वाला समझौता अदालत की देख-रेख में होता है। जिनमें सात साल से कम सजा है और बन्दी कुछ समय कारागार में व्यतीत कर चुके है। वे जुर्म स्वीकार का प्रार्थना पत्र देकर सुलह के माध्यम से अपने वाद को अन्तिम रूप से निस्तारित करा सकते है।
 
                 इस अवसर पर जेल अधीक्षक श्री एस0 के0 पाण्डेय, जेलर, जेल पीएलवीगण दीपक, सुरेन्द्र, विमल, विकास व त्रिभुवन यादव तथा काफी संख्या में महिला एवं पुरूष बंदी उपस्थित रहे।

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