जनपद न्यायाधीश मदन पाल सिंह ने बताया कि महानिबंधक, माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा कोविड-19 मामलों में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए जनपद न्यायालय/न्यायाधिकरण के क्रियाशील किए जाने हेतु अपने पत्र द्वारा दिशा-निर्देश निर्गत किए गए हैं, जिनमें माननीय न्यायालय द्वारा अधीनस्थ सभी न्यायालयों (न्यायाधिकरण सहित) पूर्व में लॉकडाउन एवं उसके पश्चात अवधि के मध्य न्यायालयों के खोले जाने एवं उनके क्रियाशील होने संबंधी समस्त पूर्वर्ती दिशा निर्देश पर अधिक भावी करते हुए दिशा निर्देश 6 अप्रैल 2021 से परिवर्तनीय किए गए हैं। उन्होंने बताया कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा निर्मित उपरोक्त दिशा-निर्देशों के परिपालनार्थ 06 अप्रैल 2021 से अग्रिम आदेश तक न्यायालय खुलने, न्यायिक कार्य संपादनार्थ आवश्यक उपक्रम सुनिश्चित किए गए हैं। माननीय उच्च न्यायालय के अधीनस्थ समस्त न्यायालयों में (न्यायाधिकरण एवं कुटुंब न्यायालयों सहित) वादों के परीक्षण में साक्ष्य अभिलेखन की कार्रवाई की अतिरिक्त, समस्त न्यायिक कार्य व प्रशासकीय क्रियाकलापों के सम्पादनार्थ प्रचलित प्रावधानों, नियमों, दिशा-निर्देशों एवं समय-समय पर निर्गत परिपत्रों के अधीन खोले जाएंगे। जबकि वाद की आवश्यकता/औचित्य के आधार पर जनपद न्यायाधीश, यदि विचारोपरांत उपयुक्त समझते हैं, तब उस स्थिति में न्यायालयों में विचाराधीन वादों के परीक्षण में साक्ष्य अभिलेखन की अनुमति प्रदान किया जा सकता है। प्रत्येक कार्य दिवस में न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्य पूर्ण होने पर न्यायिक अधिकारीगण एवं न्यायालय कर्मचारीगण को न्यायालय परिसर से चले जाने हेतु निर्देशित किया जाता है। जनपद में जेआईटीएसआई सॉफ्टवेयर (लैंड वर्जन) के माध्यम से न्यायालय कार्यवाही परिचालन करने के लिए न्यूनतम एक अथवा दो न्यायालय चिन्हित किए जाएं। न्यायालयों की कार्यवाही हेतु जेआईटीएसआई मीट वेबसाइट का उपयोग भी किया जा सकता है। विचाराधीन बंदियों से संबंधित रिमाण्ड/अन्य न्यायिक कार्य वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से ही किया जाएगा। उक्त प्रयोजन हेतु आवश्यकतानुसार जेआईटीएसआई वीडियो कॉन्फ्रेंस सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जा सकता है। पीठासीन अधिकारीगण द्वारा न्यायालय कक्षों में न्यायालय कार्रवाही हेतु एक समय में फिजिकल डिस्टेंसिंग का दिशानिर्देश सुनिश्चित करने के लिए पक्षकारों/अधिवक्तागण की उपस्थिति की संख्या न्यूनतम निर्धारित किए जाने हेतु समस्त संभव उपक्रम सुनिश्चित किए जाएंगे। पीठासीन अधिकारी किसी पक्षकार की उपस्थिति बाधित नहीं करेगे, जबतक कि वह किसी बीमारी से ग्रस्त न हो, किंतु न्यायालय कक्ष में अथवा अधिवक्तागण द्वारा बहस संबोधित किए जाने वाले स्थल पर किसी भी व्यक्ति का कड़ाई से प्रवेश रोकने हेतु अधिकृत किए जाते हैं। न्यायालय परिसर खुलने से पूर्व जिलाधिकारी अथवा अन्य प्रशासनिक अधिकारी तथा मुख्य चिकित्साधिकारी/मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के सहयोग से संपूर्ण न्यायालय परिसर की सफाई व चिकित्सा निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन करते हुए संपूर्ण सैनिटाइजेशन का कार्य सुनिश्चित कराया जाएगा। जिला स्तरीय प्राधिकारी द्वारा परिसर के सैनिटाइजेशन का कार्य दैनिक आधार पर सुनिश्चित किया जाएगा। माननीय न्यायालय के उक्त निर्देश के अनुपालन में नोडल ऑफिसर सैनिटाइजेशन को निर्देशित किया जाता है कि उक्त के संबंध में जिला स्तरीय अधिकारीगण से समन्वय स्थापित कर न्यायालय परिसर का प्रत्येक कार्य दिवस को खोले जाने से पूर्व संपूर्ण सैनिटाइजेशन कराया जाना सुनिश्चित करें। जनपद न्यायालय के वेबसाइट पर अधिवक्तागण एवं वादकारियों से सहायतार्थ लैंडलाइन/मोबाइल नंबर उल्लेखित करते हुए हेल्पलाइन प्रकाशित किए जाने एवं उसे दृढ़तापूर्वक अनुपालन अर्थ सुनिश्चित किए जाने हेतु आदेशित किया जाता है। इस प्रकार की सुविधा के लिए मानवशक्ति उपलब्ध कराने के लिए सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पैरा लीगल वालंटियर की सेवाएं लिए जाने हेतु निर्देशित किया जाता है। तद्नुसार प्राधिकरण द्वारा संतति है हेल्पलाइन दूरभाष नंबर 05452-260108 एवं पैरा लीगल वालंटियर अशोक कुमार यादव, 7905026024 एवं 8931817682 व शिवशंकर सिंह मो0नं. 9889884657 को इस सुविधा की सेवा हेतु नामित किया गया है। न्यायालय में कार्यवाही के दौरान पुरुष अधिवक्तागण द्वारा सफेद शर्ट, हल्के रंग की पैंट के साथ बैंड का प्रयोग किया जाएगा तथा महिला अधिवक्तागण द्वारा उपयुक्त हल्के रंग का परिधान बैंड के साथ प्रयोग किया जाएगा। नाइक अधिकारीगण को कोर्ट तथा गाउन पहने से मुक्त किया जाता है। उक्त दिशा निर्देश 6 अप्रैल 2021 से लागू होगा।

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