पूर्व राज्यपाल स्व. डाॅ माता प्रसाद मित्र जी को युग पुरुष उपाधि, डाॅ अजय प्रसून को साहित्य शिरोमणि 2020 एवं राम करन मिश्र सैलानी को 2020 सम्मान

पूर्व राज्यपाल स्व. डाॅ माता प्रसाद मित्र जी को युग पुरुष उपाधि, डाॅ अजय प्रसून को साहित्य शिरोमणि 2020 एवं राम करन मिश्र सैलानी को 2020 सम्मान 
अक्षय मेल लखनऊ।


माँ तारा स्मृति संस्थान व पण्डित दुर्गा प्रसाद मिश्र साहित्य सभा , लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में रसूलपुर सादात स्थित विश्वकर्मा सिटी में आयोजित सम्मान समारोह व कवि सम्मेलन व मुशायरे में दलितों के मसीहा महा मानव स्व. डाॅ माता प्रसाद मित्र जी को मरणोपरांत "युग पुरुष" की उपाधि से विभूषित किया गया ।
अरुणाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल स्व. डॉ माता प्रसाद मित्र जी का सम्मान उनके ज्येष्ठ पुत्र सेवा निवृत्त आई ए एस केशव प्रसाद व सर्व प्रकाश भास्कर ने ग्रहण किया ।
कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे अनागत साहित्य संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष डाॅ अजय प्रसून को पंडित दुर्गा प्रसाद मिश्र साहित्य शिरोमणि 2020 व बहराइच जनपद के अवधी कवि राम करन मिश्र "सैलानी" को पंडित दुर्गा प्रसाद मिश्र साहित्य योगी सम्मान वर्ष 2020 प्रदान किया गया ।
इसके अतिरिक्त हास्य कवि पण्डित बेअदब लखनवी की पूज्य माता जी स्व. माँ तारा की पावन स्मृति में साहित्यकारों में कवयित्री डाॅ सुधा मिश्रा, कवि अमर पाल अमर , सुरेश राजवंशी, सरस्वती प्रसाद रावत, सीतापुर के कवि गोदी लाल गांधी, सुन्दर संचालन कर रहे आचार्य प्रेम शंकर शास्त्री "बेताब", श्रीमती यशोदा मिश्रा व मशहूर शायर जनाब डाॅ मेहदी हसन को सारस्वत सम्मान से व दूरदर्शन केन्द्र लखनऊ के परवेज़ ज़ैदी व अहमद हमज़ा,  यू पी ब्रेकिन्ग न्यूज़ के शमीम राजा, अमर उजाला के अभिषेक सहज़, वाॅयस आॅफ लखनऊ के अनिल द्विवेदी "अंश", वर्तमान समाजवाद टाइम्स लखनऊ की प्रीति कश्यप, आई डी अब्बासी, प्रवीण कुमार, रवि रंजन कुमार, दीपक कुमार, अवध नामा के रजनीश कुमार शुक्ल, शज़र रिज्वी, दिशेरा टाइम्स के फणीन्द्र तिवारी, बहत एक्सप्रेस के उमेश तिवारी, लाईव न्यूज़ के सत्तार खान, जनसंदेश के अमित गुप्ता, राष्ट्रीय स्वरूप के पत्रकार एवं छंदकार शरद पाण्डेय "शशांक" आदि पत्रकार बंधुओं को "पत्रकार गौरव सम्मान" से सम्मानित किया गया ।
अमर पाल अमर की वाणी वन्दना से कवि सम्मेलन का शुभारंभ हुआ तो पण्डित बेअदब लखनवी ने अपनी पूज्य माता जी को समर्पित करते हुए "लौट आ बिन तेरे अब गुजारा नहीं,
माँ तेरे बिन किसी ने दुलारा नहीं,
प्यार से थी तू चन्दा बुलाती मुझे,
अब किसी आंख का मैं तो तारा नहीं  ! पढ़कर सभी को भावविभोर कर दिया ।
- पण्डित बेअदब लखनवी

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