पार्किंग स्थल में बार-बेंच की बराबर की हिस्सेदारी - ओ.पी. यादव
- कार पार्किंग के लिए जिला जज ने अधिवक्ताओं से आमंत्रित किये आवेदन
नीलम ब्यूरो दैनिक अक्षय मेल समाचारपत्र रायबरेली
रायबरेली, 6 अगस्त, 2020!
सेन्ट्रल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष पूर्व डीजीसी (फौ0) ओ.पी. यादव ने कहा कि न्यायालय के कार्य को सुचारू रूप से सम्पन्न कराने के लिए न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता व कर्मचारी के बीच सामंजस्य होना जरूरी है। तभी वादीकारी को न्याय मिलना सम्भव है। वादकारियों के हित के लिए ही न्यायपालिका गठित की गयी। वादकारी का पक्ष प्रमुखता से न्यायिक पटल पर रखने के लिए अधिवक्ता को शांतिपूर्ण वातावरण की आवश्यकता होती है। जिस न्यायालय में न्यायिक अधिकारी सामंती सोंच के तहत अधिवक्ताओं के बस्ते रात में फेंकवा दे वहां वादकारी को न्याय मिलने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। दीवानी न्यायालय में पार्किंग स्थल में वाहन खड़ा करने की बार बेंच की बराबर की हिस्सेदारी है। इसी पार्किंग स्थल में वाहन खड़ा करने के लिए जिला जज द्वारा आवेदन भी आमन्त्रित किये गये हैं, जो प्रक्रिया विचाराधीन है। कार पार्किंग दो हिस्सों में बनी है। एक भाग में न्यायिक अधिकारियों के वाहन पूरी तरह से सुरक्षित खड़े हो सकते हैं। दूसरा भाग अधिवक्ताओं के वाहनों की पार्किंग के लिए सुरक्षित छोड़ दिया जाये। वर्तमान समय में अधिवक्ताओं को बैठने के लिए चैम्बरों का अभाव है। जब तक नये चैम्बरों का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक पार्किंग स्थल के दूसरे भाग में अधिवक्ता अपने वाहन न खड़ा करें, वहाँ अधिवक्ताओं को बैठने के लिए छोड़ दें। अधिवक्ताओं के वाहन खड़ा करने के लिए दीवानी न्यायालय के गेट नं0-1 की बाउण्ड्री से जुड़ी दुकानें हटवायी जायें, इन दुकानों के कारण न्यायालय की सुरक्षा को भी खतरा रहता है, इस पर जिला जज ने पहल की थी, दुकानदारों को एक निश्चिम समय देकर दुकान खाली करने हेतु आदेशित भी किया था किन्तु कतिपय कारणों से जिला जज ने अपने ही द्वारा कहे गये मौखिक आदेश को आत्मसात कर लिया और दुकानें नहीं हटीं। श्री यादव ने मांग की है कि पार्किंग स्थल के एक भाग में अधिवक्ताओं के लिए चैम्बर की व्यवस्था होने तक बैठने दिया जाये। दीवानी न्यायालय की बाऊण्ड्री से मिली हुई दुकानें हटवाकर पार्किंग के लिए जगह खाली करायी जाये। मान्नीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद से लेकर अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायिक कक्ष के बरामदों तक में बैठकर अधिवक्ता वादकारी को न्याय दिला रहे हैं। एैसे में जिला जज को बड़ा दिल दिखाते हुए समस्या के निराकरण की पहली करनी चाहिए।

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