रायबरेली ।। 7 मई 2020 को निजी चिकित्सक के कोरोना संक्रमित मामले में जिला प्रशासन द्वारा चिकित्सक के खिलाफ एफआईआर करते ही जिले के चिकित्सकों में रोष फैल गया है और उन्होंने आज जिला प्रशासन को एक ज्ञापन देकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।आईएमए का कहना है कि चिकित्सक पर मुकदमा दर्ज करना गलत है।चिकित्सक शासनादेश के चलते ही बैठक में शामिल हुए थे।अगर मुकदमा नही खत्म किया गया तो आगे की रणनीति तय कर विरोध किया जाएगा।
दरअसल रविवार को शहर के एक निजी चिकित्सक की प्राइवेट लैब से कोरोना की जांच पॉजिटिव आने के बाद उन्हें तत्काल आइसोलेट किया गया और उनके परिवार को क़वारन्टीन किया गया।साथ ही जिला प्रशासन की एक बैठक में उनके शामिल होने पर बैठक में मौजूद 55 चिकित्सको को भी होम क्वारन्टीन किया गया।मामले ने उस समय तेजी पकड़ ली जब जिला प्रशासन द्वारा चिकित्सक पर महामारी में लापरवाही का आरोप लगाकर सदर कोतवाली में उनके व उनके स्टाफ के ऊपर एफआईआर दर्ज की गई।गुरुवार को इसके विरोध में जिले के इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारी ज्ञापन देने के लिए डीएम से मिलने पहुचे लेकिन न तो उनकी मुलाकात जिलाधिकारी से हुई और न ही सीएमओ से।आईएमए के सचिव डॉ मनीष त्रिवेदी ने बताया कि अगर इस तरह मुकदमा दर्ज किया जाएगा तो हम आपातकाल में कामनही कर पाएंगे क्योंकि अगर हम संक्रमित हुए तो हम पर भी मुकदमा दर्ज हो सकता है।अगर मुकदमा नही वापस होता है तो हमारी कमेटी जो निर्णय तय करेगी उसका पालन किया जाएगा।

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