कोरोना महामारी के चलते पूरे देश में लाक डाउन के चलते लोगों का आवागमन बंद होने से पशु पक्षियों को भी भुखमरी का सामना करना पड़ रहा है,

       दैनिक अक्षय मेल समाचार पत्र
कुलदीप यादव   संवाददाता

कोरोना  महामारी के चलते पूरे देश में लाक डाउन के चलते लोगों का आवागमन बंद होने से पशु पक्षियों को भी भुखमरी का सामना करना पड़ रहा है, इनकी तरफ किसी का ध्यान नहीं जा रहा है, लाक डाउन के चलते जनमानस जहां अपने घरों में रह रहे है, और बाहर ना निकलने से उन जानवरों को भी भुखमरी का सामना करना पड़ रहा है, जो इंसान पर ही आश्रित है, अमेठी के मुसाफिरखाना में सुल्तानपुर लखनऊ हाईवे पर स्थित कादू नाला के जंगल में बंदरों का एक बड़ा समुदाय रहता है, जहां लाक डाउन के पहले आवागमन के चलते राहगीर व गाड़ी चालक उनके लिए कुछ न कुछ खाने की चीजें ले जाकर खिलाते रहते थे। लाकडाउन के बाद से आवागमन बंद होने से वहां के बंदर भुखमरी के कगार पर आ गए हैं । ऐसे में पड़ोसी गांव नेवादा के संजय सिंह,अखिलेश सिंह, हनुमान यादव जी,अनुज  यादव जी  परम मित्र अमित यादव जी,अनिल  यादव जी,कुलदीप  यादव  तथा अन्ये साथी मिलकर अपनी उदारता को रोक ना सके और स्वयं खाने की चीजें और फल लेकर लोगों के साथ जंगल में पहुंचकर बंदरों को खिलाया अपना भोजन पाकर बंदर का झुंड खाने के टूट पड़ा आप देख सकते हैं, कि ऐसे उन्हें उनका भोजन दिया जा रहा है और कैसे झपट कर दौड़ दौड़ कर खा रहे हैं।

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