संकट की घड़ी में 11 ब्रदर्स जरूरतमंद लोगों के लिए बने मसीहा




नीलम ब्यूरो हिन्दी दैनिक अक्षय मेल समाचार पत्र रायबरेली




रायबरेली ।। "मैं अकेला ही चला था जानिबे मंजिल, मगर लोग आते गए और कारवां बनता गया" ये लाइनें 11 ब्रदर्स टीम पर बिल्कुल सटीक बैठती है, क्योंकि (कोविड 19)कोरोना जैसी वैश्विक महामारी ने जहाँ पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है वहीं भारत भी इससे अछूता नहीं है । भारत में भी इस वायरस ने कोहराम मचा कर रख दिया है । भारत की अर्थव्यवस्था, सामाजिक ताने-बाने को बिखेर रख दिया है, लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो गए, जहां सारे उद्योग धंधे चौपट हो गए तो गरीब, दिहाड़ी मजदूरों को दो वक्त की रोटी के लाले पड़ गए औऱ पैदल ही परदेश को छोड़ कर परिवार के साथ जान जोखिम में डालकर अपने घर वापसी के लिए कदमों को बढ़ा दिया औऱ भारत की लम्बी दूरी की सड़कों को कदमों से नाप डाला, औऱ मोदी सरकार के 5 ट्रिलियन इकोनामी के दावों की पोल खोल कर रख दी ।

वहीं संकट की इस घड़ी में रायबरेल मे जिस तरह से जमीनी स्तर पर 11 ब्रदर्स टीम जरूरतमंदों तक पहुंचकर उन्हें हर संभव मदद जैसे राशन किट, लंच पैकेट, नये राशन कार्ड बनवाना, घनी आबादी में सामूहिक किचन, द्वारा भोजन का वितरण करवाना ,राहगीरों व प्रवासी मजदूरों के लिए चप्पल की स्टाल लगवाना , रात दिन हमारी सुरक्षा की कमान संभालने वाले जांबाज पुलिस कर्मियों, स्वास्थ्य कर्मियों के लिए भोजन, पानी, चाय ,बिस्किट, फल, वगैरह मुहैया कराना । इस प्रकार के अनेकों काम का जो बीड़ा उठाया उसकी चर्चा आज पूरे जनपद में आम लोगों से लेकर शासन प्रशासन के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है जो आज 11 ब्रदर्स टीम रायबरेली में लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण बनकर उभर रही है ।

वही बताते चलें कि इलेवन ब्रदर्स टीम के सदस्यों ने अपनी आय का 30 प्रतिशत इस नेक मुहिम के लिए दान कर दिया है जो बिल्कुल अराजनैतिक है जो गंगा जमुनी तहजीब की एक मिशाल है जो भारत की एकता अखंडता और भाईचारे का पैगाम देती है।
11 ब्रदर्स टीम में राहुल बाजपेई, अविनाश सिंह, मोहम्मद वसीम, श्रीकांत मिश्रा, सिद्धार्थ (शनि) टोनी, लाला, गोलू, अंबू सिंह एडवोकेट, अजीम, अन्ना, मोनू सोनकर, रफीक शेख( पत्रकार) ।।

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