बहुजन समाज पार्टी के बड़े नेता और खासकर दलितों की राजनीति करने वाले डा. इंद्रजीत सरोज जो कांशीराम के समय से पार्टी से जुड़े रहे, लेकिन साल 2017 में उनका पार्टी से अलगाव हो गया, इसके बाद काफी सोच विचार के बाद उन्होने समाजवादी पार्टी के दामन को थाम लिया.
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महसाचिव की भूमिका में इंद्रजीत सरोज का मानना है कि दलितों को उनका हक सपा मुखिया अखिलेश यादव ही दिला सकते हैं क्योंकि वे नेकदिल और सच्चे इंसान हैं.
इंद्रजीत सरोज की राजनीतिक पारी की बात की जाए तो साल 1983 में उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में दाखिला लिया. इसी दौरान वे बहुजन मूवमेंट में भाग लेने लगे. इसी दौरान ने वे कांशीराम के संपर्क में आए. और बामसेफ के साथ मिलकर काम करने लगे.
वो बताते हैं कि कांशीराम ने मुझे मंझनपुर सीट से प्रत्याशी बनाया पहली बार तो मैं चुनाव हार गया लेकिन इसके बाद इसी सीट से चार बार चुनाव जीता
इस दौरान बसपा सरकार में वे मंत्री बनाए गए और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तक की पारी उन्होंने खेली. लेकिन अगस्त 2017 में उन्होंने बसपा के दामन को छोड़ दिया. काफी सोच विचार करने के बाद समाजवादी पार्टी में शामिल हुआ, कहा कि जिस बुनियादी विचारधारा के साथ समाजवादी पार्टी का गठन हुआ था, वही सोच समाजवादी पार्टी की भी है. हालिया राजनीति में समाजवादी पार्टी ही वो पार्टी है जो दबे कुचले, दलित, पिछड़ों की राजनीति कर रही है.
कहा कि योगी सरकार में गरीब, दलित और पिछड़ा खूब छला गया है. बकौल इंद्रजीत सरोज बसपा जिस मिशन को लेकर बनी थी व चली थी उसे अंजात तक पहुंचाने का माद्दा अगर किसी राजनेता में हैं तो वो हैं अखिलेश यादव
यही वजह है कि बसपा के लोगों का एक बहुत बड़ा तबका अखिलेश यादव के साथ आया है. क्योंकि अखिलेश को उनकी सोच और विचारधारा के करीब पाता है इसी को देखते हुए वह समाजवादी पार्टी से जुड़ रहा है.
उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति मूल रुप से बसपा का है तो वह अखिलेश के नेतृत्व में का करना चाहेगा क्योंकि उसे पता है कि भाजपा नागनाथ है तो कांग्रेस सांपनाथ. यह दोनों ही पार्टियां कभी भी दलितों और पिछड़ों का उत्थान नहीं देख सकती.
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