बीकापुर बदहाल है आयुर्वेद की सरकारी चिकित्सा व्यवस्था


अक्षय मेल समाचार
अशोक कुमार वर्मा संवाददाता बीकापुर अयोध्या


तहसील क्षेत्र में कुछ ऐसे भी अस्पताल है जहां पर पांच वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी डॉक्टर तैनात नहीं हो सके हैं। धनवंतरि की आयुर्वेद चिकित्सा का बुरा हाल है। सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धति का दायरा बढ़ने के बजाय घटने लगा है, या यूं कहे कि आयुवेर्दिक चिकित्सा घर की रसोई तक ही सिमट कर रह गई है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। बीकापुर में धनवंतरि के आयुर्वेदिक चिकित्सालयों का बुरा हाल है। यहां पर एक वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त डा०अवनीश चंद श्रीवास्तव के बाद अभी तक किसी की तैनाती नहीं की गई, इसी तरह 2015 में खजुरहट आयुर्वेदिक चिकित्सालय से डा०वी के भगत के रिटायर्ड होने के बाद कोई चिकित्सक की तैनाती नहीं हो सकी।यही हालात बोदहरी की है। ऐसे में फार्मासिस्ट के सहारे चिकित्सालय चलाए जा रहे हैं। अधिक समय बीत जाने के बाद भी डॉक्टर तैनात नहीं हो सके हैं।  कई क्षेत्रों में सरकारी आयुर्वेदिक चिकित्सा व्यवस्था के बारे में लोगों को जानकारी ही नहीं है। अस्पतालों में दवाएं तो आ रही है लेकिन उन्हें लेने वालों की संख्या काफी कम है। सरकारी आयुर्वेदिक अस्पतालों की बात करें तो चार चार  बेड वाले अस्पतालों बोदहरी और खजुरहट तो स्टाफ की भारी अभाव के चलते  में प्रत्येक माह नया पुराना मिलाकर प्रयाप्त मरीज नही आते है। अस्पतालों की बदहाली व स्वास्थ्य कर्मचारियों के नहीं रहने के कारण लोगों सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धति से लोगों का विश्वास उठने लगा है। सूत्रों से पता चला है कि बीकापुर आयुर्वेदिक चिकित्सालय में 12 बेड की व्यवस्था तो है लेकिन एक वर्ष से चिकित्सक नहीं है जबकि एक पुरुष और एक महिला चिकित्सक पद होने के बाद भी हमेशा इस चिकित्सालय में अभाव बना रहने के साथ स्टाफ की कमी कई वर्षों से बनी हुई है।इसी तरह बोदहरी, और खजुरहट में स्थित आयुर्वेदिक चिकित्सालय की हालत बद से बद्तर बन गरीब है। तीनों चिकित्सालय में प्रर्याप्त  फार्मासिस्ट ,वार्ड बॉय,  सफाई कर्मी की तैनाती न होने से साफ सफाई राम भरोसे पर है।

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