संत शिरोमणि गुरु रविदास साहेब जी का643वा जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया

संत शिरोमणि गुरु रविदास साहेब जी का643वा जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया

नीलम ब्यूरो अक्षयमेल रायबरेली


रायबरेली ।।  अंबेडकर नगर विकास समिति के द्वारा अंबेडकर पार्क में अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े  अल्पसंख्यक समाज के धार्मिक, सामाजिक उत्थान के संत शिरोमणि गुरु रविदास साहिब जी का 643 वीं जयंती समारोह बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया । मुख्य अतिथि इ.हारेद्र गौतम सबसे पहले तथागत गौतम बुद्ध, रविदास जी, बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर अंबेडकर जी के चित्र पर पुष्प गुच्छ भेंट कर नमन कर, उसके बाद तथागत भगवान गौतम बुद्ध के बताये पंचशील सिद्धांतों को पढ़ा गया। गुरु जी के जन्मोत्सव पर सामाजिक  साहित्यिक, धार्मिक, आर्थिक वर्तमान संदर्भ में संवैधानिक चिंतन वैचारिक संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन भी किया गया, इसमें पत्रकारों को भी सम्मानित करते हुए संत शिरोमणि जी के चित्र को भेंट किया गया। इस समारोह में नगर के बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं, नौजवान ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया । मंच संचालक एवं अंबेडकर नगर विकास समिति के संस्थापक अध्यक्ष "राजेश कुरील" ने सभी आगंतुकों का स्वागत सत्कार करते हुए कहा कि संत शिरोमणि रविदास साहिब जी के ज्ञान के प्रकाश से समस्त मानव जाति को प्रकाशित किया है। उन्होंने मानव को मानव से प्रेम करने का मार्ग बताया । गुरु रविदास जी का नाम संतों में सबसे पहले लिया जाता है, इसीलिए उनका नाम संत शिरोमणि हैं। रविदास जी ने कहा मनुष्य अपने मन  कर्म, वचन से ही श्रेष्ठ होता है, इसीलिए उन्होंने कहा है कि ""मन चंगा तो कठौती में गंगा"" गुरुजी ने कहा ""ऐसा चाहू राज मै, जहां मिले सब को अन्न । छोटे बडो सभ सम बसें, रविदास रहै प्रसन्न।। गुरु रविदास जी ऐसे समाज की परिकल्पना की थी "जहां पर न कोई  नीचे और ना कोई ऊंच" सभी मनुष्य एक समान है, क्योंकि यह शरीर खून, हाड, मांस से बना है। सभी के शरीर में एक निर्मल जीवात्मा का वास है उसे जैसे चाहो आप खुद सही और गलत के रास्ते पर ले जा सकते हैं।

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