निजी स्कूल शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का किया जेब खाली



नीलम ब्यूरो अक्षयमेल रायबरेली

रायबरेली भारत सरकार का नारा है कि  चलो सभी स्कूल की ओर  इसी तर्ज पर सर्व शिक्षा अभियान चलाया गया और अभियानों को जमीन तक पहुंचाने के लिए वह पूरे देश को शिक्षित करने के लिए करोड़ों - अरबों रुपए पानी की तरह बहा रही है, वही आए दिन निजी स्कूलों की मनमानी के चलते सरकार के दावों की पोल खुल रही है। निजी स्कूलों द्वारा जिस प्रकार से एक आम आदमी मिडिल क्लास आदमी की जेब में डाका डाला जा रहा है उससे कहीं ना कहीं यह बात तो साफ हो गई है कि निजी स्कूल भी नहीं चाहते कि देश शिक्षित हो और भारत विकसित देश से विकासशील देश की ओर बढ़ सकें । एक ऐसा ही मामला  रायबरेली जिले में  देखने को मिला  जहां पर अभिभावकों ने रायबरेली के सेंट जेम्स स्कूल एंड कॉलेज जो गोरा बाजार में स्थित है वहां की प्रबंधक में मन माफित फीस व मनचाहा फाइन लगाने के लिए कुछ ऐसे नियम कानून बना रखे हैं जिससे आम आदमी परेशान हो चुका है, इसी की शिकायत के लिए प्रमोद कुमार जिनके बच्चे सेंटेंस स्कूल एंड कॉलेज में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं जिनकी पढ़ाई के लिए प्रमोद कुमार को जनवरी- फरवरी व मार्च तीनो महीनों की स्कूल फीस 1 महीने में जमा करने के लिए कहा गया, वही 15 जनवरी के पहले फीस न जमा होने के चलते उन पर ₹960 प्रति बच्चा जुर्माना भी लगाया गया जहां एक और बात अगर 2 महीनों की फीस की जाए तो विद्यालय प्रबंधक की मनचाही के अनुसार टियूशन फीस 2400 रुपए , कंप्यूटर फीस 300 रुपये , लाइब्रेरी फीस 100 रूपये, एक्टिविटी मिसलेनियस 400 रूपये, कुल मिलाकर 3200 रुपये जमा करना पड़ता है और देरी हो जाने पर अभिभावक पर 960 रुपये जुर्माना लगाकर कुल मिलाकर 4160 रुपये का डाका डाला जाता है । इससे स्कूल द्वारा मनमाने तरीके से बढ़ाए गए फीस को लेकर अभिभावकों में काफी रोष  दिखा,  और डीएम साहिबा से शिकायत की । अब देखना यह है कि डीएम साहिबा क्या कार्यवाही करती हैं ।

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