पारंपरिक श्रद्धा एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है दीपावली का पर्व


पारंपरिक श्रद्धा एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है दीपावली का पर्व

 राजेश पाल की रिपोर्ट

 शुकुल बाजार अमेठी आज   पारंपरिक श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया जा रहा है दीपावली का पर्व चारों तरफ उत्साह देखा जा रहा है कस्बे में मिठाई की दुकान से लेकर पटाखों के दुकानों पर चहल कदमी देखी जा रही है । यह त्योहार आध्यात्मिक रूप से अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है ।भारतवर्ष में मनाए जाने वाले सभी त्यौहारों में दीपावली का सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व है। इसे दीपोत्सव भी कहते हैं। ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ अर्थात् ‘अंधेरे से ज्योति अर्थात प्रकाश की ओर जाइए’ यह उपनिषदों की आज्ञा है। इसे सिख, बौद्ध तथा जैन धर्म के लोग भी मनाते हैं। जैन धर्म के लोग इसे महावीर के मोक्ष दिवस के रूप में मनाते हैं तथा सिख समुदाय इसे बन्दी छोड़ दिवस के रूप में मनाता है।
माना जाता है कि दीपावली के दिन अयोध्या के राजा राम अपने चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात लौटे थे। अयोध्यावासियों का ह्रदय अपने परम प्रिय राजा के आगमन से प्रफुल्लित हो उठा था। श्री राम के स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दीपक जलाए। कार्तिक मास की सघन काली अमावस्या की वह रात्रि दीयों की रोशनी से जगमगा उठी। तब से आज तक भारतीय प्रति वर्ष यह प्रकाश-पर्व हर्ष व उल्लास से मनाते हैं। यह पर्व अधिकतर ग्रिगेरियन कैलन्डर के अनुसार अक्टूबर या नवंबर महीने में पड़ता है। दीपावली दीपों का त्योहार है। भारतीयों का विश्वास है कि सत्य की सदा जीत होती है झूठ का नाश होता है। दीवाली यही चरितार्थ करती है- असतो माऽ सद्गमय, तमसो माऽ ज्योतिर्गमय। दीपावली स्वच्छता व प्रकाश का पर्व है। कई सप्ताह पूर्व ही दीपावली की तैयारियाँ आरंभ हो जाती हैं। लोग अपने घरों, दुकानों आदि की सफाई का कार्य आरंभ कर देते हैं। घरों में मरम्मत, रंग-रोगन, सफ़ेदी आदि का कार्य होने लगता है। लोग दुकानों को भी साफ़ सुथरा कर सजाते हैं। बाज़ारों में गलियों को भी सुनहरी झंडियों से सजाया जाता है। दीपावली से पहले ही घर-मोहल्ले, बाज़ार सब साफ-सुथरे व सजे-धजे नज़र आते हैं।
 कार्तिक महीने की अमावस्या के दिन दीपावली यानी कि दिवाली का त्योहार मनाया जाता है इस बार 27 अक्टूबर को देश भर में दिवाली का त्योहार मनाया जाएगा इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिये इस दिन को बहुत ही शुभ माना जाता है मान्यता है कि दिवाली के दिन दीपों की रोशनी में मां लक्ष्मी घर में आती हैं ।
ये भी मान्यता है कि प्रभु श्री राम की अयोध्या वापसी पर लोगों ने उनका स्वागत घी के दिये जलाकर किया. अमावस्या की काली रात को रोशन हो गई इसलिये दिवाली को प्रकाशोत्सव भी कहा जाता है।

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