सार्वजनिक शौचालय ना होने से कस्बा वासियों को हो रही परेशानी


सार्वजनिक शौचालय ना होने से कस्बा वासियों को हो रही परेशानी




[शुकुल बाजार अमेठी जहां सरकार की मंशा स्वच्छ भारत मिशन की है वही  कस्बे में एक भी सार्वजनिक सामुदायिक सुलभ शौचालय नहीं उपलब्ध है ।जबकि कस्बे में प्रतिदिन आने वालों की संख्या लगभग 10,000 है यही नहीं कम से कम कस्बे में हजारों दुकानदार स्थाई तौर पर रहते हैं और दुकानों में कहीं भी शौचालय नहीं है। ऐसे में किसी भी व्यक्ति को अगर शौच के लिए जाना है तो खुले में शौच के लिए मजबूर है।  कस्बा ही नहीं  विकासखंड के अंतर्गत जैनम गंज, सत्थिन, महोना, जैसे किसी भी कस्बे में सार्वजनिक सुलभ शौचालय मौजूद नहीं है। जबकि सरकार एक परिवार के लिए तो शौचालय मुहैया करा रही है लेकिन जहां हजारों लोगों का सुबह से शाम तक रहना है वहां एक भी सुलभ सामुदायिक शौचालय नहीं है ऐसे में कैसे खुले में शौच से मुक्त हो सकता है भारत। कस्बा वासियों समेत कस्बा आने वाले ग्राहकों ने शासन प्रशासन व उच्च अधिकारियों से शुकुल बाजार कस्बे में सार्वजनिक सुलभ शौचालय बनवाए जाने की मांग की है । बताते चलें दुकानदार और ग्राहकों में महिलाएं बुजुर्ग और बच्चे भी होते हैं जिन्हें अनैच्छिक क्रिया सताने पर शौच के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है और उसके बाद आसपास कहीं खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं जिससे गंदगी भी बढ़ती है वहीं लोगों को परेशानी भी होती है।

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