भक्तों को श्रीमद् भागवत कथा का रसपान करा रहे : पं अवधेश महराज जी


भक्तों को श्रीमद् भागवत कथा का रसपान करा रहे : पं अवधेश महराज जी

अक्षय मेल समाचार

शुकुल बाजार ,अमेठी।
जब जब पृथ्वी पर अधर्म व अत्याचार बढ़ जाता है तब तब प्रभु विभिन्न रूपों में पृथ्वी पर जन्म लेते हैं  व उनका विनाश करते हैं  धर्म की रक्षा के लिए भगवान के 24 अवतारों का वर्णन किया गया है जिनमें 18 वां अवतार प्रभु राम व 20 वां अवतार प्रभु श्याम के रूप में उल्लेख किया गया है उक्त उद्गार ग्राम कमालचक हरखूमऊ में श्रीमद् भागवत पुराण कथा व ज्ञान यज्ञ के अवसर पर कथावाचक वाचक पंडित अवधेश मिश्र जी ने भक्तजनों को पावन कथा का रसपान कराते हुए कथा के प्रारंभ में व्यक्त किये, उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर धर्म की रक्षा के लिए प्रभु का अवतार लेना भक्तजनों की रक्षा करना है वह अपने भक्तों को सदा प्रसन्नचित देखना चाहते हैं भक्त का भी यह कर्तव्य है कि वह अपने सांसारिक मोह माया को त्याग कर भगवान शरण में जाकर भगवत ध्यान करें तभी मोक्ष की प्राप्ति होती है । कथा को प्रारंभ करते हुए कहा कि कलयुग के वशीभूत होकर राजा परीक्षित को श्राप मिला था कि सात दिन के अंदर उनकी मृत्यु हो जाएगी अकाल मृत्यु व श्राप को कम करने की व्यवस्था के तहत श्री सुखदेव जी महाराज ने गंगा के किनारे उन्हें श्रीमद् भागवत कथा का पाठ सुनाया जिसके बाद उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई । गौरतलब है कि कमालचक हरखूमऊ में मनोज पाल के यजमानत्व मे श्रीमद् भागवत कथा एवं ज्ञान यज्ञ किया जा रहा है कथा श्रवण के लिए क्षेत्र के सैकड़ों नर नारी प्रातः एवं सायंकाल बेला में कथा का रसपान बड़े ही आनंद से कर रहे हैं श्री पाल ने क्षेत्रीय लोगों से अपील की है कि कथा की रसपान हेतु अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर श्रीमद् भागवत कथा का आनंद प्राप्त करें।

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