अक्षयमेल समाचार/ राजेश पाल
शुकुल बाजार ,अमेठी ।दो साल पहले प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत करके देश को स्वच्छ भारत बनाने को प्रेरित किया था तो हर तरफ एक मुहिम से चल पड़ी थी लेकिन यह मुहिम कुछ दिनों के बाद अब ठंडी पड़ गई कस्बा हो या गांव कोई जगह ऐसी नहीं जिसे स्वच्छ कहा जाए स्वच्छ भारत मिशन गंदगी के बोझ तले दबकर रह गया कस्बा से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक हर जगह गंदगी का ही बोलबाला है कहीं टूटे शौचालय तो कहीं मानव मल सड़कों पर पसरा हुआ है सफाई कर्मियों की भरकम फौज मौज कर रही है जबकि गांव में गंदगी का अंबार लगा हुआ है आलम यह है कि तमाम सरकारी प्रतिष्ठान भी गंदगी की गिरफ्त में जकड़े हुए हैं यह गंदगी कब महामारी का रूप धारण कर ले कुछ कहा नहीं जा सकता लेकिन जिम्मेदारों पर इसका कोई असर नहीं पड़ता
ध्वस्त शौचालय खुले में शौच बनी मजबूरी
विकासखंड के ग्राम पंचायतों में बनाए गए शौचालयों में शायद ही कोई ऐसा हो जो प्रयोग के लिए माना जाता हो प्रमुख मार्गो पर भोर व शाम के समय लोगों की भारी भीड़ देखी जाती है जिसमें महिलाओं को तमाम प्रकार के समस्याओं से गुजरना पड़ता है सर्वाधिक समस्या किशोरियों वह बच्चियों को होती है क्षेत्रवासियों का कहना है कि गांव में बनाए गए शौचालयों का कोई मतलब नहीं रह गया है शौचालय के नाम पर सिर्फ एक ईंट की दीवार खड़ी कर दी गई है

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