श्राद्ध करने से पितरों को मिलती है शांति


हिंदू धर्म में पितृपक्ष का है विशेष महत्व 


श्राद्ध करने से पितरों को मिलती है शांति

अक्षय मेल समाचार/  राजेश पाल 


  शुकुल बाजार ,अमेठी ।पितृ पक्ष  का विशेष महत्‍व है मान्‍यता है कि अगर श्राद्ध न किया जाए तो मरने वाले व्‍यक्ति की आत्‍मा को मुक्ति नहीं मिलती है। पितरों को तृप्‍त करने और उनकी आत्‍मा की शांति के लिए पितृ पक्ष में श्राद्ध किया जाता है।इस बार पितृ पक्ष 13 सितंबर से शुरू होकर 28 सितंबर को खत्म हो रहा है ।पितरों को तृप्‍त करने करने के लिए श्राद्ध किया जाता है पिंड दान व तर्पण कर उनकी आत्‍मा की शांति की कामना की जाती है।पितृ पक्ष  के दौरान दिवंगत पूर्वजों की आत्‍मा की शांति के लिए श्राद्ध  किया जाता है। मान्‍यता है कि अगर पितर नाराज हो जाएं तो व्‍यक्ति का जीवन भी खुशहाल नहीं रहता और उसे कई तरह की समस्‍याओं का सामना करना पड़ता है। यही नहीं घर में अशांति फैलती है और व्‍यापार व गृहस्‍थी में भी हानि झेलनी पड़ती है। ऐसे में पितरों को तृप्‍त करना और उनकी आत्‍मा की शांति के लिए पितृ पक्ष में श्राद्ध  करना जरूरी माना जाता है। श्राद्ध के जरिए पितरों की तृप्ति के लिए भोजन पहुंचाया जाता है और पिंड दान  व तर्पण  कर उनकी आत्‍मा की शांति की कामना की जाती है। हिंदू पंचांग के मुताबिक पितृ पक्ष अश्विन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ते हैं । इसकी शुरुआत पूर्णिमा तिथि से होती है, जबकि समाप्ति अमावस्या पर होती है अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक हर साल सितंबर महीने में पितृ पक्ष की शुरुआत होती है। आमतौर पर पितृ पक्ष 16 दिनों का होता है ।इस तरह 13 सितंबर- पूर्णिमा श्राद्ध , 14 सितंबर- प्रतिपदा, 15 सितंबर-  द्वितीया, 16 सितंबर- तृतीया, 17 सितंबर- चतुर्थी, 18 सितंबर- पंचमी, महा भरणी, 19 सितंबर- षष्ठी, 20 सितंबर- सप्तमी, 21 सितंबर- अष्टमी, 22 सितंबर- नवमी, 23 सितंबर- दशमी, 24 सितंबर- एकादशी, 25 सितंबर- द्वादशी, 26 सितंबर- त्रयोदशी, 27 सितंबर- चतुर्दशी, 28 सितंबर- सर्वपित्र अमावस्या है। पिंड दान करने के बाद पुरोहित या ब्राह्मण को भोजन कराएं और दक्षिणा दें. 
- ब्राह्मण को सीधा या सीदा भी दिया जाता है. सीधा में चावल, दाल, चीनी, नमक, मसाले, कच्‍ची सब्जियां, तेल और मौसमी फल शामिल हैं. 
- ब्राह्मण भोज के बाद पितरों को धन्‍यवाद दें और जाने-अनजाने हुई भूल के लिए माफी मांगे. 
- इसके बाद अपने पूरे परिवार के साथ बैठकर भोजन करें.

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