अक्षय मेल समाचार/ मोहम्मद जुबेर
सिद्धौर,बाराबंकी। यूपी के बाराबंकी के क्षेत्र असन्द्रा में आज दस मोहर्रम मनाई गई यह मोहर्रम का महीना शुरू होते ही जगह-जगह जुलूस निकाले जाते हैं तथा मजलिसे करवाई जाती हैं बताया जाता है कि ये मोहर्रम का महीना हजरत इमाम हुसैन की शहादत की यादगार में मनाया जाता है आज दस मोहर्रम को कर्बला की तपती हुई जमीन पर हजरत इमाम हुसैन की शहादत हुई थी इस्लाम को बचाने के लिए हजरत इमाम हुसैन को अपनी कुर्बानी देनी पड़ी बाराबंकी क्षेत्र असन्द्रा व मिर्चिया मे दस मोहर्रम कुछ इस तरह से मनाई गई मोहर्रम की दस तारीख को ताजिया व आलम जुलूस निकाल कर कर्बला की जानिब ले जाते हुए रास्ते में जंजीर व कमा का मातम करते हुए जुलूस को निकाला जाता है और कर्बला की तरफ बढ़ते हुए मातम करते हुए कर्बला तक पहुंचते हैं और कर्बला में ताजियाओं को दफनाया जाता है बताया जाता है की मोहर्रम की दस तारीख को जब कर्बला की तपती हुई जमीन पर यजिदियों व हुसैन के बीच जंग हो रही थी उस समय उनके नाना जान की नमाज का वक्त हो गया था और उन्होंने नमाज पढ़ना शुरू कर दिया नमाज अदा करते हुए जिस वक्त सजदे में गए उसी वक्त जालिमों ने उनके सर को तन से जुदा कर दिया भूखे प्यासे इमामे हुसैन को आज के दिन ही यजिदियों ने कर्बला की तपती हुई जमीन पर शहीद कर दिया था तारीख गवाह है तारीख बताती है की आज वो तारीख वो दिन है जिस दिन हजरत इमाम हुसैन की शहादत हुई थी इसीलिए लोग उनकी यादगार में जगह-जगह सबील यानी शरबत व चाय व अन्य खाने-पीने की चीजों का इंतजाम किया जाता है और लोगों को खिलाया पिलाया जाता है ।

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