राजेश पाल की रिपोर्ट
शुकुल बाजार अमेठी जहां सरकार एक तरफ करोड़ों रुपए सफाई के लिए सफाई कर्मियों के वेतन में पानी की तरह बहा रही है वहीं सफाई कर्मी गांव में सफाई ना करके मौज मस्ती कर रहे हैं विकासखंड के कई ग्राम सभाओं में सफाई कर्मी ना आने से ग्रामीणों ने सफाई का जिम्मा खुद अपने आप उठाये देखे जा रहे हैं उरेर मऊ बच्चा मऊ गयासपुर अहमदपुर पूरे दुनिया आदि ग्राम सभाओं में सफाई कर्मी नदारद देखे जा रहे हैं ग्रामीणों ने बताया कि सफाई कर्मी द्वारा मजदूर लगाकर सफाई करवा दी जाती है लेकिन कोई स्थाई सफाई कर्मी अभी तक नहीं आया नालियां कचरे से भरी पड़ी है मानसून का आगाज हो चुका है अगर यही स्थिति रही तो आगामी बारिश में क्या स्थित हो होगी इसका अंदाजा इन ग्राम सभाओं के हालात से लगाया जा सकता है सफाई कर्मी ब्लॉक परिसर में ही एंट्री दर्ज करवाते रहते हैं ग्रामीण क्षेत्रों की हालत बद से बदतर है
जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी मौन है जिसके चलते गंभीर बीमारियों का खतरा भी मंडराने लगा है बताते चलें सरकार ने साफ सफाई के लिए सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति कर रखी है लेकिन यह सफाई कर्मी ग्राम सभाओं में बहुत कम ही दिखाई देते हैं या यूं कहें कभी नहीं दिखाई देते ऐसा क्षेत्रवासियों का कहना है फिलहाल ग्राम सभाओं की बात तो दूर कस्बे में भी ज्यादातर नालियां चोक है गंदगी से पटी पड़ी हैं जिससे है कचड़ा और गंदा पानी बराबर सड़क पर बह रहा है जिससे सड़कें उखड़ कर गड्ढे में तब्दील हो चुकी हैं यानी एक तरफ सड़क का नुकसान दूसरी तरफ जनमानस को परेशानी उसके बाद भी नालियों की सफाई नहीं हो रही है यह अपने आप में बड़ा सवाल है आखिर मोटी पगार लेने वाले सफाई कर्मचारी क्या कर रहे हैं दूसरी तरफ उन पर दबाव डालने वाले और उनसे काम कराने वाले अधिकारी कहां व्यस्त और मस्त हैं जबकि सरकार सफाई अभियान को सफल बनाने के लिए सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति कर रखी है जिन्हें मोटी पगार देती है लेकिन जब शुकुल बाजार कस्बे की नालियां गंदगी से पटी पड़ी हैं इनकी सफाई नहीं हुई तो ग्राम सभाओं में अंदाजा लगाया जा सकता है कैसे हालात होंगे विकासखंड के सभी अधिकारियों कर्मचारियों जनप्रतिनिधियों का हमेशा आना जाना लगा रहता है क्षेत्र के प्रबुद्ध जनों नेशासन-प्रशासन उच्च अधिकारियों से मांग की है कि नालियों की सफाई अभिलंब कराई जाए
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