मान्यता प्राप्त विद्यालयों में गरीब व निराश्रित परिवारों के 25 प्रतिशत छात्रों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान न करने पर होगी कड़ी कार्यवाही।




विजय कुमार यादव।
मुुसाफिरखाना /अमेठी ।शासन के  कड़े नि
र्देश के बाद जिले का शिक्षा विभाग के आला अधिकारी समस्त मान्यता प्राप्त विद्यालयों में गरीब व निराश्रित परिवारों के  25 प्रतिशत छात्रों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करने की कवायद में तेजी से जुड़ गया है ।ऐसे में मान्यता प्राप्त विद्यालयो के संचालकों के सामने एक नई समस्या उतपन्न होती दिख रही है ।जबकि बिना मान्यता  व आधी अधूरी मान्यता के दम पर इण्टर तक स्कूल चलाने वालों की पौ बारह हो गयी है ।

प्रदेश सरकार के कड़े तेवरों के बाद हरकत में जिले के शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों ने मान्यता प्राप्त समस्त शिक्षण संस्थानों में गरीब व निराश्रित परिवारों के छात्रों को हर हाल में 25 प्रतिशत प्रवेश निःशुल्क कराने की कवायद में तेजी से जुट गया है ।सरकार के निर्देश के बाद सभी मान्यता प्राप्त विद्यालयों के संचालकों की धड़कन बढ़ गयी है ।सरकार का आदेश सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों पर लागू होगा किन्तु ऐसे विद्यालय जो प्राथमिक स्तर की मान्यता लेकर इण्टर तक की कक्षाये चला रहे है कुछ जूनियर वर्ग की मान्यता लेकर इण्टर में सभी वर्गों की कक्षाओं का संचालन कर रहे है उन पर यह आदेश कैसे क्रियान्वित होगा जो सबसे बड़ा प्रश्न है ।मान्यता प्राप्त विद्यालयो में जिले के करीब दो  दर्जन से अधिक विद्यालयों को छोड़ दे तो ज्यादातर संचालक जैसे तैसे विद्यालयों का संचालन कर रहे है कुछ विद्यालयों में ली जाने वाले समस्त प्रकार के शुल्कों से अध्यापकों व अन्य कर्मचारियों का वेतन बमुश्किल ही निकल पाता है ।हालात यह है कि प्रत्येक मान्यता प्राप्त विद्यालयो के अगल  बगल अन्य दर्जन भर विद्यालय बिना मान्यता के या आधी अधूरी मान्यता के बूते बेख़ौफ़ संचालित किए जा रहे है ।आखिर बिना मान्यता अथवा आधी अधूरी मान्यता वाले विद्यालयों पर प्रशासन कैसे अपने आदेश को लागू करवा पायेगा ।मान्यता प्राप्त विद्यालयों के संचालकों के सामने दोहरी चुनौती मुंह फैलाकर खड़ी दिख रही है ।सबसे पहले तो व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए शासनादेश के मुताबिक मानक के अनुकूल शिक्षकों की तैनाती करने के साथ ही पर्याप्त छात्र संख्या सुनिश्चित करना होता है जबकि बिना मान्यता या आधी अधूरी मान्यता वाले स्कूलों में संचालक मानक के अनुकूल शिक्षकों को नियुक्त करने के बजाय मनमानी रूप में पढ़े लिखे बेरोजगार युवकों को शिक्षक के रूप में रख कर मोटी कमाई करते रहते है ।जिले के कुछ ऐसे विद्यालय है जो संचालित तो जिले की सीमा में होते है किंतु उनके यहाँ पढ़ने वाले छात्रों का पंजीकरण फ़ैजाबाद जौनपुर व प्रतापगढ़ में अच्छी खासी सहूलियत की शर्त पर करवा दिया जाता है ।ऐसे विद्यालय सहूलियत के नाम पर अभिभावकों से अच्छी खासी मोटी रकम वसूल कर अपनी जेब भरते है जबकि मान्यता प्राप्त विद्यालय जिले के आलाधिकारियों की मंशा के अनुरूप कक्षाओं में शिक्षण कार्य के साथ ही अन्य गतिविधियों को संचालित करने की बैधानिक मजबूरी भी होती है ।गैर जनपदों से कागजी शिक्षा प्राप्त छात्रों की उपस्थिति जिले  के मान्यता प्राप्त स्कूलों में जरूर देखी जा सकती है ।

गरीब व निराश्रित परिवारों के छात्रों की बेहतरी के लिए जनपद के मान्यता प्राप्त विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटें निर्धारित करना अच्छी शुरुवात है अब सबसे बड़ा सवाल जो लोगो के जेहन में गूंज रहा कि बिना मान्यता अथवा आधी अधूरी मान्यता वाले स्कूलों पर कितना प्रभाव पड़ता है यह तो आने वाले कुछ महीनों में स्पष्ट हो जायेगा ।

जिला विद्यालय निरीक्षक से इस सम्बन्ध में वार्ता की गयी तो उन्होंने बताया कि 01 जुलाई से विद्यालय खुलने के बाद ऐसे विभागीय अधिकारियों की टीम गठित कर ऐसे विद्यालयों को चिन्हित किया जायेगा और उनके खिलाफ आवश्यक कार्यवाही की जायेगी ।

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