बाजार शुकुल अमेठी-पूरे बडगाइन गाँव के साँई धाम मंदिर पर चल रही संगीत मयी राम कथा के तीसरे दिन राम जन्म की कथा श्रद्धालुओं को कथा व्यास मिथिलेश जी द्वारा रसास्वादन कराया गया जिसमें राम के पूर्वज मनु ,को तपस्या के लिये श्रेष्ठ स्थान नैमिषारण्य बताया गया जहाँ मनु और सतरूपा ने 23हजार वर्ष तक तप करने के पश्चात ब्रह्म से उन्ही के समान पुत्र का वरदान प्राप्त किया
संगीत मयी राम कथा के तीसरे दिन श्रोताओं ने राम जन्म की पावन कथा का रसास्वादन किया कथा व्यास मिथिलेश जी ने बताया कि मनु और सतरूपा ने 23हजार वर्ष तक नैमिषारण्य में तपस्या एक पाँव पर खडे होकर करते रहे जिन्होने अन्न और जल का परित्याग कर दिया जिससे शरीर जर्जर हो गया मनु की यह दशा देख महा ब्रह्म ने आकर वरदान मांगने के लिये मनु को विवश कर दिया जबकि मनु ब्रह्म के दर्शन से ही तृप्त हो गये थे किन्तु अन्ततोगत्वा मनु ने ब्रह्म के बार -बार कहने के पश्चात उन्हीं के समान पुत्र का वरदान माँग लिया
आगे चल कर चक्रवर्ती राजा दशरथ और कौशिल्या द्वारा पुत्र कामेष्टि यग्य के पश्चात-भये प्रगट कृपाला दीन दयाला,का पावन अवसर प्राप्त हुआ प्रभु का प्राक्टय-सिर्फ विप्र,धेनु सुर सन्त हित लीन्ह मनुजअवतार!इस प्रकार प्रभु का अवतार ब्राहमण गाय,देवताऔर सन्तों की भलाई और उनकी रक्षा के लिये हुआ करता है और जब -जब पृथ्वी पर अत्याचार बढता है धर्म की हानि होती है तब प्रभु मनुज रूप में अवतरित होते हैं अवतार वाद की इस धारणा को मानस कार तुलसी दास ने बडे सुन्दर भावों में व्यक्त किया है जब जब होहि धरम कर हानी !बाढहि असुर अधम अभिमानी !तब तब प्रभुधर मनुज शरीरा ,हरहिं सकल सज्जन भव पीरा!इस प्रकार श्रोताओं ने राम जन्म की पावन कथा भरपूर आनन्द उठाया
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