कानपुर के पत्रकारो ने एस एस पी आवास का किया घेराव।
अक्षय मेल समाचार
कानपुर ,उत्तर प्रदेश(ब्यूरो)-
यूं तो कहने को उत्तर प्रदेश मे भाजपा की योगी सरकार सत्ता पर आसीन है।भाजपा जो हमेशा से कड़े शासन की बात करती आयी है।महिलाओ की सुरक्षा की बात हो या फ़िर स्वच्छ भारत अभियान हर क्षेत्र मे अपनी पीठ थपथपाते नही थकते।योगी जी उत्तर प्रदेश से अपराधियों के सफाये की बात करते नही थकते.हा सफाई तो हो रही है पर बदमाशों व अपराधियों की नही आम जनता और पत्रकारो की सफाई हो रही है।बदमाशों मे किसी प्रकार का कोई भय नही खुले आम दिन दहाडे एक पत्रकार को गोली मार दी जाती है।और 4दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस लाचार नज़र आती है अपने बचाव मे एक स्केच जारी कर जनता को शांत करने की कोशिश करते पुलिस वाले कब तक अपनी नाकामी छुपाते रहेंगे।कानून की लचर व्यवस्था के कारण कोई भी अपराधी संगेह अपराध करने से गुरेज नही करता ।उसे अपनी रिहाई के सारे हथकण्डे मालूम होते है और पैसे के दम पर वो कुछ दिनो मे जमानत पर छूट जाता है बस फ़िर मिलती रहती है तारीख तारीख पर तारीख. तारीख पर तारीख और तारीख के भंवर जाल मे खो जाता है न्याय.जिसकी आस मे लोग अपना सबकुछ बेच देते है.सबकुछ खो देते है।
बात उन पत्रकारों की है जिनके ऊपर हमले होते है जिन्हे जान से मार दिया गया उनका क्या कसूर.क्या सच्चाई के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले के साथ यही होना चाहिये?क्या अब सच्चाई इसी तरह दबाई जायेगी? क्या होगा आम आदमी का ?क्या होगा समाज का ?कैसे आने वाली पीढ़ी को हम सुरक्षित रख पायेंगे?
कुछ ऐसे ही सवाल है कई पत्रकारों के जिनके केस यूं ही थानों की अल्मारियों मे धूल का फूल बनी हुई है।
जिसमे गत दिनो धर्मेंद्र सिंह के परिवार पर फतेहपुर मे जानलेवा हमला हुआ उसके पहले उनके काकादेव स्थित मकान मे आग लगाई गयी जिसमे कई जूलस गये और शायद दो या तीन लोग मर गये।क्या हुआ पप्पू यादव के केस का जिसकी अभीतक जूही पुलिस जांच तक नही कर पायी जबकि पप्पू यादव के परिवार पर कई बार हमले हो चुके है यहां तक पप्पू यादव की 70वर्ष की आयु की बुजुर्ग मां के हाथ पर सूजे से वार कर लहू लूहान कर दिया गया।
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