संकट में भक्तों के पुकारने पर नंगे पैर दौड़ पड़ते हैं भगवान

मुसाफिरखाना/अमेठी:-,प्रभु अपने भक्त के कष्ट निवारण के लिए नंगे पाव दौड़े चले आते है जैसे घड़ियाल से गजानन को संकट में देख प्रभु ने भवसागर पार उबारा था ठीक उसी प्रकार यदि प्राणी भी अगर सच्चे मन से प्रभु को याद करे तो प्रभु कष्ट दूर करते है विकासखंड के करपिया में चल रही संगीतमयी श्री मदभागवत कथा के छठे दिवस की कथा में  कथावाचक पं राजेश तिवारी "निर्मोही" भक्तो को कथा रसपान कराते हुए कहा । श्री तिवारी जी एक कथा का का जिक्र करते हुए कहा की एक पत्नी ब्राह्मण थी गरीब संतसेवी थी एक दिन भगवान ने संत का बेस धारण क़र ब्राह्मणी की परीक्षा लेना चाहा और कहा देवी भोजन कराओ लेकिन उस दिन ब्राह्मणी के घर में कुछ नही था और वह पास के दुकानदार के पास गयी और बोली भैया हमे थोडा आटा दाल उधार दे दो लेकिन ब्यापारी कामज्जवल से ब्यथित था  ब्राह्मणी बहुत सुन्दर थी और कहा देवी उधार क्यों लेती हो हमे अपने स्तनों को दे दो ब्राह्मणी इसके मनोबलो को समझ गयी क्योकि घर पर अतिथि आये थे कहा ठीक है और भगवान को भोजन कराया तभी रसोइया में गयी और अपने स्तनों को काटकर थाली में रख दुकानदार के पास ले गयी और बोली भैया आपने हमारी इज्जत को मागा था और लो दुकान वाला पागल हो गया और भागा ब्राह्मणी गिर गयी तभी भगवान प्रगट भये और बोलो देवी आपने एक संत के लिए अपनी इज्जत दाव पे लग दी जाओ में बचन देता हूँ द्वापर में जब मेरा कृष्णा अवतार होगा जन्म तो देवकी के गर्भ से होगा लेकिन मैं दूध इन्ही  स्तनो का पीऊगा ।वही ब्राह्मणी यहाँ आकर के यशोदा मैया बनी ।कथा के अंत में यजमान संतलत बहादुर सिंह ने सपरिवार सहित ब्यास पीठ की आरती उतारी और आये हुए श्रोतागणो के प्रति आभार प्रगट किया । इस मौके पर मोहित गुप्ता अजय सिंह पंकज गुप्ता राम राज राजेश विवेक आदि सैकड़ो गणमान्य  मौजूद रहे ।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ