राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार एवं माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर श्रीमती वाणी रंजन अग्रवाल के निर्देशन में 04 मार्च 2023 से 11 मार्च 2023 तक ‘‘अन्तर्राष्ट्रीय महिला सप्ताह’’ के अवसर पर महिलाओं को उनके अधिकारों एवं कानूनों की जानकारी प्रदान कराने हेतु अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/एफ.टी.सी./सचिव पूर्णकालिक, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर प्रशान्त कुमार की अध्यक्षता में 10 मार्च 2023 को ‘‘जिला कारागार, जौनपुर’‘ में विधिक साक्षरता/जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
जेल अधीक्षक द्वारा बताया गया कि जिला कारागार में कुल 1036 बन्दी है, जिनमें 87 पुरूष तथा 10 महिला सिद्धदोष बन्दी हैं तथा 846 पुरूष तथा 29 महिलाएं एवं 31 अल्पवयस्क विचाराधीन बन्दी तथा प्रशासनिक आधार पर अन्य कारागार से प्राप्त बंदियों की संख्या 33 है। कारागार में निरूद्ध महिला बन्दियों के साथ कुल 06 बच्चे हैं।
शिविर को सम्बोधित करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/एफ.टी.सी./सचिव पूर्णकालिक, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण प्रशात कुमार द्वारा बताया गया कि भारत में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिये सबसे पहले समाज में उनके अधिकारों और मूल्यों को मारने वाले उन सभी राक्षसी सोच को मारना जरूरी है जैसे दहेज प्रथा, अशिक्षा, यौन हिंसा, असमानता, भू्रण हत्या, महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा, बलात्कार, वैश्यावृत्ति, मानव तस्करी और ऐसे ही दूसरे विषय। लैंगिक भेदभाव राष्ट्र में सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक अंतर ले आता है जो देश को पीछे की ओर ढ़केलता है। भारत के संविधान में उल्लिखित समानता के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए महिलाओं को सशक्त बनाना सबसे प्रभावशाली
जेल अधीक्षक द्वारा बताया गया कि जिला कारागार में कुल 1036 बन्दी है, जिनमें 87 पुरूष तथा 10 महिला सिद्धदोष बन्दी हैं तथा 846 पुरूष तथा 29 महिलाएं एवं 31 अल्पवयस्क विचाराधीन बन्दी तथा प्रशासनिक आधार पर अन्य कारागार से प्राप्त बंदियों की संख्या 33 है। कारागार में निरूद्ध महिला बन्दियों के साथ कुल 06 बच्चे हैं।
शिविर को सम्बोधित करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/एफ.टी.सी./सचिव पूर्णकालिक, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण प्रशात कुमार द्वारा बताया गया कि भारत में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिये सबसे पहले समाज में उनके अधिकारों और मूल्यों को मारने वाले उन सभी राक्षसी सोच को मारना जरूरी है जैसे दहेज प्रथा, अशिक्षा, यौन हिंसा, असमानता, भू्रण हत्या, महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा, बलात्कार, वैश्यावृत्ति, मानव तस्करी और ऐसे ही दूसरे विषय। लैंगिक भेदभाव राष्ट्र में सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक अंतर ले आता है जो देश को पीछे की ओर ढ़केलता है। भारत के संविधान में उल्लिखित समानता के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए महिलाओं को सशक्त बनाना सबसे प्रभावशाली
उपाय है इस तरह की बुराईयों को मिटाने के लिये।
महिला सशक्तीकरण के बारे में बताया कि महिला सशक्तीकरण में ये ताकत है कि वो समाज और देश में बहुत कुछ बदल सके। वो समाज में किसी समस्या को पुरूषों से बेहतर ढ़ंग से निपट सकती है वो देश और परिवार के लिये जनसंख्या के नुकसान को अच्छी तरह से समझ सकती है। अच्छे पारिवारिक योजना से वो देश और परिवार की आर्थिक स्थिति का प्रबंधन करने में पूरी तरह से सक्षम है। पुरूषों की अपेक्षा महिलाये किसी भी प्रभावकारी हिंसा को संभालने में सक्षम है चाहे वो पारिवारिक हो या सामाजिक।
महिला बन्दियों को बताया गया कि ऐसे विचाराधीन बन्दी जो अपने वादों में पैरवी हेतु अधिवक्ता करने में अक्षम है तथा ऐसे सिद्धदोष बन्दी जो अपने मामलों में उच्च न्यायालय में अपील करने में अक्षम हों वह कारागार अधीक्षक के माध्यम से अपने प्रार्थना पत्र जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में प्रस्तुत कर निःशुल्क अधिवक्ता प्राप्त कर सकते हैं।
इस अवसर पर जेल अधीक्षक एस0के0 पाण्डेय, डिप्टी जेलर राजकुमार सिंह, धर्मेन्द्र सिंह व श्रीमती सुषमा शुक्ला, चिकित्साधिकारी डा0 रविराज, फार्मासिस्ट सतीश कुमार गुप्ता तथा जेल पी0एल0वी0 गण व अन्य उपस्थित रहे।
महिला सशक्तीकरण के बारे में बताया कि महिला सशक्तीकरण में ये ताकत है कि वो समाज और देश में बहुत कुछ बदल सके। वो समाज में किसी समस्या को पुरूषों से बेहतर ढ़ंग से निपट सकती है वो देश और परिवार के लिये जनसंख्या के नुकसान को अच्छी तरह से समझ सकती है। अच्छे पारिवारिक योजना से वो देश और परिवार की आर्थिक स्थिति का प्रबंधन करने में पूरी तरह से सक्षम है। पुरूषों की अपेक्षा महिलाये किसी भी प्रभावकारी हिंसा को संभालने में सक्षम है चाहे वो पारिवारिक हो या सामाजिक।
महिला बन्दियों को बताया गया कि ऐसे विचाराधीन बन्दी जो अपने वादों में पैरवी हेतु अधिवक्ता करने में अक्षम है तथा ऐसे सिद्धदोष बन्दी जो अपने मामलों में उच्च न्यायालय में अपील करने में अक्षम हों वह कारागार अधीक्षक के माध्यम से अपने प्रार्थना पत्र जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में प्रस्तुत कर निःशुल्क अधिवक्ता प्राप्त कर सकते हैं।
इस अवसर पर जेल अधीक्षक एस0के0 पाण्डेय, डिप्टी जेलर राजकुमार सिंह, धर्मेन्द्र सिंह व श्रीमती सुषमा शुक्ला, चिकित्साधिकारी डा0 रविराज, फार्मासिस्ट सतीश कुमार गुप्ता तथा जेल पी0एल0वी0 गण व अन्य उपस्थित रहे।

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