आदर्श बनने की राह पर सीएचसी रामपुर 95 प्रतिशत टीकाकरण

अक्षय मेल समाचार जौनपुर
सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं के शत प्रतिशत धरातल पर दिखने की बात हो या फिर अस्पताल में स्टाफ की 24 घंटे उपलब्धता, इन सभी मामलों में जिले की रामपुर सीएचसी का नाम सबसे ऊपर है। यहां के लाभार्थी तो यहां से मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं के इस कदर कायल हैं कि सीएचसी रामपुर अब उन्हें अपने गांव का हिस्सा लगने लगा है। तभी तो जब किसी राष्ट्रीय टीम का दौरा होना होता है तो सीएचसी रामपुर का नाम सबसे पहले आता है।

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ नरेंद्र सिंह ने बताया कि नियमित टीकाकरण में रामपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का बेहतरीन प्रदर्शन है। 2018-19 में यहां 83 प्रतिशत टीकाकरण हुआ। 2019-20 में 87 प्रतिशत और 2020-21 में 95 प्रतिशत। विश्व स्वास्थ्य संगठन के निरीक्षण में भी यहां 95 प्रतिशत बच्चों को टीके लगे मिले। कोविड-19 की सैम्पलिंग और टीकाकरण में भी यहां 17,000 की सैम्पलिंग हो चुकी है जो कि जिले में दूसरे नम्बर पर सर्वाधिक है। जबकि कोविड-19 के टीकाकरण में लक्ष्य के सापेक्ष 83 प्रतिशत लाभार्थियों को टीका लगाया जा चुका है।
बेहतर रहा सुपोषण अभियान

अप्रैल 2020 से अभी तक कोरोना का कहर था और लोगों का बाहर निकलना मुश्किल था। इस दौर में भी अप्रैल 2020 से अभी तक यहां की राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की टीम ने चार अतिगंभीर कुपोषित (सैम) बच्चों की तलाश की और उन्हें कुपोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराकर उन्हें कुपोषण से मुक्ति दिलाई। 2019-20 में भ्रमण कर 44 हजार 623 बच्चों का परीक्षण किया। इसमें 404 अस्वस्थ बच्चों का उच्च अस्पतालों में इलाज कराया। 2020-21 में 17,000 लोगों की सैम्पलिंग कराने में लैब टेक्नीशियन आदि के साथ लगी रही।

नसबंदी अपनाने में अव्वल
    परिवार नियोजन कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ राजीव यादव ने बताया कि यहां जिले में सर्वाधिक लोगों ने नसबंदी अपनाई है। इस उपलब्धि पर हाल ही में प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ प्रभात यादव को तत्कालीन जिलाधिकारी दिनेश सिंह ने सम्मानित किया था। दिसम्बर 2020 के दौरान 240 महिला नसबंदी हुई थी जबकि वर्तमान में यह संख्या 603 है।

 लक्ष्य के करीब गोल्डन कार्ड

     आयुष्मान भारत योजना में रामपुर क्षेत्र में 9,300 परिवार आते हैं। इसके सापेक्ष 11,000 लोगों के गोल्डन कार्ड बनाए जा चुके हैं। इस ब्लाक क्षेत्र में कोई ऐसा गांव नहीं है जहां कम से कम एक परिवार का गोल्डेन कार्ड बना हो।
      रघुनाथपुर गांव की सपना पांडे (26 वर्ष) ने बताया कि आशा कार्यकर्ता निर्मला पांडे उन्हें प्रसव के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रामपुर में लेकर आई थी। 11 नवम्बर 2020 को उनका प्रसव हुआ था। उस समय अस्पताल में मुफ्त खाना, मुफ्त दवाई आदि पूरी सुविधा निःशुल्क मिली। मेरा प्रसव डॉ. बबिता यादव ने कराया और अब भी बहुत खयाल रखतीं हैं। मुझे प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान का पैसा भी मिल गया है। 
     अकरा गांव के हृदय नारायन सिंह (60 वर्ष) ने बताया कि लगभग एक माह पहले उनके पेट में दर्द था। यहां से दवा ली और ठीक हो गया। बुखार या कोई और परेशानी होती है तो यहीं आता हूं। डॉ. विकास हर समय मिल जाते हैं। उन्होंने बताया कि मेरे पिताजी के पैर में फ्रैक्चर हो गया था। उनको जिला अस्पताल रेफर किया गया। मुफ्त एंबुलेंस सेवा 108 से जिला अस्पताल में ले गया और वहां पूरा इलाज हुआ। 
        चिकित्साधिकारी डॉ. प्रभात यादव ने बताया कि सुबह 10 से शाम 6 बजे तक यहीं रहता हूं। डॉक्टरों के लिए यहां आवास नहीं है। इसलिए रात में पास के ही अपने आवास में चला जाता हूं। डॉ. विकास गुप्ता ने बताया कि 22 मार्च 2020 को तैनाती के बाद से आज तक मैंने कोई छुट्टी नहीं ली हैं। वहीं एसीएमओ डॉ. राजीव यादव के अनुसार जब भी मैं सीएचसी जाता हूं डॉ. विकास सक्रिय मिलते हैं।
      डॉ. प्रभात के अनुसार ठंड में प्रतिदिन यहां की ओपीडी में 150 से 200 होती है जबकि गर्मी में यही संख्या 400 तक चली जाती है। उन्होने बताया कि दुर्घटना वाले मामलों में तो एक साथ 10 लोगों को भी रेफर किया जाता है। जबकि समान्यतः प्रतिदिन 2 से 3 केस हायर सेंटर के लिए रेफर किए जाते हैं।
   मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ राकेश कुमार ने बताया कि सरकार से फंड आने पर यहां के लोगों की आवास की व्यवस्था का प्रयास करेंगे।
 राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम
        डॉ. संजय कुमार सिंह के अनुसार राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत बच्चों की 38 बीमारियों का इलाज करते हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों पर 7 माह से 3 वर्ष और 3 वर्ष से 6 वर्ष बच्चे पंजीकृत हैं। उनमें से ऐसे बच्चों की प्राइमरी और मिडल स्कूल, आंगनबाड़ी और मदरसा में तलाश की जाती है। औसतन हर दिन 100 बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की जाती है। शारीरिक समस्या मिलने पर स्थानीय स्तर, जिला मुख्यालय या आवश्यकता पड़ने पर बीएचयू मरीज को ले जाते हैं। कोविड संक्रमण की वजह से अभी कोई जांच नहीं हो पा रही है। उन्होने बताया कि नोनारी बेनीपुर के राकेश जायसवाल की डेढ़ साल की बेटी गीत जायसवाल की जन्मजात बीमारी कटे होठ और कटा तलवा के इलाज के लिए प्रक्रिया चल रही है। पेपर वर्क पूरा होते ही मुफ्त इलाज शुरू हो जाएगा। दो महीने के भीतर तीन सैम बच्चों का एनआरसी जौनपुर में इलाज कराया जबकि मैम बच्चों का यहीं पर इलाज कर उन्हें ठीक कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि दो महीने के अंदर वह 28 से 30 मैम बच्चों का इलाज कर उन्हें सही कर चुके हैं

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