सुल्तानपुर ग्रामसभा में भू माफियाओं के हौसले बुलंद

सुल्तानपुर ग्रामसभा में भू माफियाओं के हौसले बुलंद 




महराजगंज रायबरेली 
एक तरफ जहां  कोरोना महामारी से  पूरा देश और प्रदेश  लगातार जूझ रहा है तो वही महाराजगंज तहसील क्षेत्र का  सुल्तानपुर ग्राम सभा  दोहरा दंश झेल रहा हैं ग्रामसभा में भू माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद है  कि वह प्रदेश सरकार के एंटी भू माफिया एस्कॉर्ट को खुले आम चुनौती दे रहे हैं ।प्रदेश सरकार द्वारा भले ही एंटी भू माफिया एस्कॉर्ट का गठन कर लगातार भू माफियाओं पर शिकंजा कसने की बात कही जा रही हो। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही हैं ।ताजा मामला महाराजगंज तहसील क्षेत्र के सुल्तानपुर ग्राम सभा का है जहां ग्राम सभा के लगभग सभी गावो में लेखपाल की सह पर खुलेआम ग्राम सभा की सुरक्षित जमीनों पर अवैध निर्माण और कब्जे कराए जा रहे हैं और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है ।
                         आपको बता दें कि महाराजगंज तहसील क्षेत्र के सुल्तानपुर ग्राम सभा के चिलौली बलईमऊ, सुल्तानपुर, हाजीपुर, आदि गांव में क्षेत्रीय लेखपाल की सह पर खुलेआम सुरक्षित जमीनों पर अवैध निर्माण कराए जा रहे हैं आपको बता दें कि अवैध निर्माण कराने में लेखपाल की भूमिका संदिग्ध है लेखपाल जी पहले तो काम की जानकारी होते ही उसे रुकवा देते हैं उसके बाद  सौदा तय होने के बाद में उसी काम को करवा देते हैं लेखपाल का यह कारनाम एक ही नहीं हैं जब आप इस ग्राम सभा में लोगो से पूछोगे तो आपको ग्राम सभा के नागरिकों से लेखपाल के कारनामों की चर्चा सुनने को मिल जाएगी लगातार चाहे ग्राम सभा की बंजर जमीन पर अवैध निर्माण का मामला हो या चाहे ग्राम सभा में पड़ी सुरक्षित प्राथमिक विद्यालय की जमीन पर अवैध निर्माण का मामला हो और चाहे चारागाह की जमीन पर निर्माण और कब्जे  की बात हो या तालाब की जमीन पर अबैध कब्जे की बात हो सूत्रों की माने तो लेखपाल जी हर अवैध कब्जे का सौदा अपने स्तर से तय करवाते हैं उसके बाद सौदा तय होने पर जो पहले लेखपाल के नक्शे में सुरक्षित जमीन होती है वही सौदा तय होने के बाद आबादी में बदल जाती है वाह रे लेखपाल वाह रे तेरे कारनामे इन कारनामों की चर्चा पूरे क्षेत्र में जोरों पर है लोगों का कहना है कि पैसे वाले लोगों के लिए लेखपाल साहब के पास कोई कानून नहीं है और गरीबों पर लेखपाल का कानून ऐसा शिकंजा कसता है कि गरीब दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो जाता हैं
                तो वही अबैध निर्माण का यह खेल यही नहीं रुका उसके बाद भी ग्राम सभा के  गाँवो में लगभग आधा दर्जन अवैध निर्माण और कब्जे लेखपाल की सांठगांठ और खाऊ कमाऊ नीति के चलते सुरक्षित जमीनों पर किए गए हैं। इसके पूर्व जब शासन द्वारा सुरक्षित जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराने को लेकर अभियान चलाए जा रहा था उस समय भी लेखपाल ने महज कागजी कोरम पूरा करते हुए ग्राम सभा कि सुरक्षित पड़ी जमीन को कागजों पर खाली दिखा दिया जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है  ग्रामसभा की सुरक्षित जमीन भू माफियाओं के चंगुल में इस कदर फसी हैं कि वहाँ पर पैर रखने तक की जगह नहीं है। ग्राम सभा में मछली पालन के लिए  बने हुए तालाबों में लगातार धान की फसल उगाई जा रही हैं।

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