नीलम ब्यूरो/ रिपोर्ट अनील कुमार
हिन्दी दैनिक अक्षय मेल समाचार पत्र रायबरेली
रायबरेली।। प्रदेश सरकार प्रवासी मजदूरों को गैर प्रदेशो से उन्हें लाकर उनके घर पहुचाने का दावा तो जरूर कर रही है और इसका क्रेडिट मौजूदा सरकार से लेकर विपक्ष भी लेना चाहता है।लेकिन इन श्रमिको की हकीकत क्या है देर रात दिखी तस्वीरों ने सरकार के सभी दावों की पोल खोल कर रख दी।गुरुवार की देर रात रायबरेली के लालगंज में दर्जन भर मजदूर अपने सामान को कंधों पर लादकर पैदल ही घरों की ओर जाते दिखे जब उनसे बात की गई तो उन्होंने सरकारी दावों की हवा निकाल दी।
जिले के लालगंज कस्बे में सड़क पर मौजूद और अपने सामान को कंधों पर उठाए तेज कदमो से चल रहे ये लोग रायबरेली के सरेनी के विभिन्न गांवों के निवासी है श्रमिक है जो गुजरात गए थे रोजी रोटी कमाने के लिए लेकिन लॉकडाउन ने इनके सपनो पर पानी फेर दिया और दो जब इनका काम धाम बंद हुआ तो इनको खाने के लाले पड़ गए और ये घर वापसी के लिए गुहार लगाने लगे।देर से सही सरकार के कानों में इनकी आवाज़ पहुची और जोर शोर से इनको लाने का प्रयास शुरू हुआ।स्पेशल ट्रेनें चलाई गई रियायती किराए की बात भी की गई।6 मई को इनको गुजरात से लाकर गोरखपुर स्टेशन पर उतारा गया और इन्हें परिवहन निगम की बस से रायबरेली लाया गया।बस यही से सरकारी कारिंदों की ड्यूटी समाप्त हो गई।लेकिन इन मजदूरों की दुश्वारियां शुरू हो गई न तो इनके जेब मे पैसा था और न ही खाने की व्यवस्था स्टेशन से इनके घर की दूरी 70 किमी थी साधन कोई नही।थकहार कर पैदल ही इन्होंने घर पहुँचने का निर्णय लिया और रात को ही चल दिये।जब ये देर रात लालगंज पहुचे तो वंहा जब इनसे पैदल आने का कारण पूछा गया तो इन्होंने अपना दुख कैमरे पर बयां कर दिया जो आप भी सुन लीजिए।
सरकार इन मजदूरों की स्वास्थ्य जांच से लेकर इनके खाने पीने के दावे तो जरूर कर रही है।विपक्षी इनको अपने पास से किराया भी देने की बात कर रही है लेकिन जब इन्हें पैदल ही घर जाते हुए देखा गया तो इन राजनीतिक लोगो की कलई खुलकर सामने आ गई।

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