अमेठी में जहां कोरोना महामारी के 27 मामले पाए गए हैं जिसके चलते अमेठी का ऑरेंज जोन खतरे में पड़ गया है । ऐसे में लोकडाउन के चलते आम जनता भारी परेशानी उठा रही हैं। अमेठी में मजदूर वर्ग की खासी लंबी तादाद है ।लोकडाउन के चलते उन मजदूरों की माली हालत भी खराब हो गई है । लोग अपने भोजन के लिए चिंतित हैं । वही जंगलों में रहने वाले पशु पक्षियों के लिए भी लोकडाउन परेशानी व चिंता खड़ी किए हैं । अमेठी के मशहूर स्वतंत्रता संग्राम स्थल कादू नाला के बारे में बताते हैं ।अमेठी का एक मशहूर कादू नाला 18 57 की क्रांति से लेकर भारत की आजादी में शहीद होने वाले वीर सपूतों के बलिदान की यादों को अपने में संजोए हुए हैं । यहां पर घना जंगल है और इसी जंगल के बीच में से राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 931 पुराना राष्ट्रीय राजमार्ग 56 निकलता है ।योगदान इस राष्ट्रीय राजमार्ग से निकलने वाले यात्री ट्रक ड्राइवर और बसों में सवार यात्रीगण अपने पास बचे हुए भोज्य पदार्थ को पुल पर दान कर देते थे । जो यहां के जंगलों में रहने वाले बंदर खाकर अपना जीवन गुजारते लेकिन लोकडॉउन में इन बंदरों की हालात भी खराब हो गई । ना तो यात्री बस निकलती है और ना ही यात्रीगण , वही बात रही ड्राइवरों की तो उन्होंने भी अपने स्तर से भोजन लेकर चलना कम कर दिया है । ऐसे में यहाँ के बंदर हाईवे पर दौड़ते हुए वाहनों को देखते रहते हैं लेकिन हर बार उन्हें निराशा हाथ लगती है । इन बंदरों की पीड़ा को पूरे पटइ मजरे पूरे प्रेमशाह निवासी आशीष यादव की नजर पड़ी तो इन्होंने इन बंदरों के खाने का इंतजाम किया और उनके लिए कुछ ना कुछ लेकर प्रतिदिन आते हैं और बंदरों को भोजन की व्यवस्था करते हैं आशीष यादव को देखकर बन्दरो का झुंड उनके चारों तरफ आकर बैठ जाता हैं ,उसके बाद आशीष यादव धीरे-धीरे उनको अपने पास से लाए हुए सामान को वहीं पर बांटते चले जाते हैं । जिसे पाकर बंदर खुश हो जाते हैं । आशीष यादव ने मानवता की मिसाल कायम करते हुए ना केवल मानव बल्कि मानव से जुड़े हुए अन्य प्राणियों के प्रति दया भाव प्रदर्शित किया है।

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