विगत वर्ष में धान की फसल में कंडवा रोग जिसे लोकल भाषा में भुण्ड रोग कहते हैं। धान की फसल को क्षति पहुंचाई थी। जब इसका प्रकोप होता है तो हल्दी की तरफ पीला और बाद में फिर काला पढ़कर के दाने खराब हो जाते हैं। ना तो यह खाने के उपयोग में ही आ सकता है और ना तो बेचने के योग्य समझा जाता है ।
इसलिए सभी किसान भाइयों से मेरा आग्रह है कि इस रोग से बचने के लिए हमारे किसान कल्याण केंद्र शाहगढ़ पर ट्राइकोडर्मा , विवेरिया बैसियाना 75% अनुदान के रूप में उपलब्ध है। कृपया आप सभी किसान भाई बीज की नर्सरी डालने से पहले इससे बीज का शोधन करें एवं सड़ी हुई पास में मिलाकर के उसी खेत में डालना है जिसमें आप नर्सरी डालें। इस प्रकार करने से तमाम तरीके की जो बीमारियां आती हैं, वह नहीं आएगी। बीज शोधन, भूमि शोधन , जड़ कन्द शोधन, में ट्राइकोडरमा के उपयोग से भूमि जनित तथा बीज जनित रोगों से रक्षा होती है।
मिट्टी ,हवा, जल आदि में प्रदूषण नहीं फैलता है। उत्पादों का स्वाद बढ़ता है तथा रोगों में इसके प्रति प्रतिरोधक क्षमता नहीं पनपती है। इसका प्रयोग अनाज, दलहन, तिलहन, मसाले, औषधियां, फूलों, पान, सब्जियों एवं फलों आदि सभी प्रकार की फसलों पर किया जा सकता है। इसके प्रयोग से आर्द्र गलन, बीज सड़न, जड़ सड़न, तना सड़न, उकठा , मूल, ग्रंथि आदि रोगों से पूर्ण या आंशिक फायदा पहुंचाता है।
कृषि विभाग
जनपद अमेठी

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