डॉ भीमराव अंबेडकर के 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर की दीक्षाभूमि में लिए गए दीक्षा दिवस के अवसर पर विचार गोष्ठी


डॉ भीमराव अंबेडकर के 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर की दीक्षाभूमि में लिए गए दीक्षा दिवस के अवसर पर  विचार गोष्ठी

अक्षयमेल समाचार

रायबरेली। डॉ भीमराव अंबेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसाइटी रायबरेली केध तत्वाधान में इंदिरा नगर स्थित एक निजी गेस्ट हाउस में डॉ भीमराव अंबेडकर के 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर की दीक्षाभूमि में लिए गए दीक्षा दिवस के अवसर पर  विचार गोष्ठी तथा सम्मान समारोह का कार्यक्रम आयोजित किया। 
      इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में इंजीनियर हरेंद्र गौतम,  विशिष्ट अतिथि इंजीनियर हरनाम सिंह,  इंजीनियर भीमराज , इंजीनियर गौतम जयंत , संजीत कुमार इलाहाबाद उपस्थित रहे । 
अतिथियों ने बाबा साहब के जीवन दर्शन पर आधारित अपने विचार व्यक्त किए।  कार्यक्रम की शुरुआत सबसे पहले बौद्ध भिक्षु विवेकानंद ने बुद्ध वंदना त्रिशरण और पंचशील से कराई। कार्यक्रम का संचालन सामाजिक चिंतक सुनील दत्त ने किया। 
      इस अवसर पर संस्था के संस्थापक  बीडी सुमन ने दर्जनों सामाजिक कार्यकर्ताओं को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया।  सम्मानित होने वाले लोगों में रामनरेश भारती, नरेंद्र कुमार, रामसनेही विनय, सुधीर संत, सुनीता, शशिबाला , वेद प्रकाश , कालिका प्रसाद , राजाराम, सत्येश गौतम , श्री राम , सुरेश कुमार , अशोक सरद एवं चंद्रशेखर जी प्रमुख रहे। 
 इस अवसर पर साहित्यकार रामसनेही विनय, अमेठी पूर्व बसपा जिला अध्यक्ष सुरेश कमल,  दैनिक पब्लिक पावर समाचार पत्र एवं सूर्या न्यूज़ टीवी चैनल के ब्यूरो प्रमुख सत्येश गौतम, देशराज, खुशीराम रावत, एम एल गौतम, मोहम्मद शब्बीर आदि ने भी संबोधित किया।  कार्यक्रम में सरोज अनिल कुमार प्रवक्ता इंटर कॉलेज गौरा , सी बी गौतम, विमल किशोर सबरा , छोटेलाल गौतम, सुजीत कुमार ,रोहित कुमार चौधरी ,राहुल वर्मा, संतराम, नीलमणि सुमन, वेद प्रकाश ,राकेश गौतम, मंगल प्रसाद ,समाकांत आदि उपस्थित रहे । 
कार्यक्रम का उद्घाटन पूर्व डीआईजी डॉ हवलदार सिंह ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में डॉ अंबेडकर को युगपुरुष बताया । मुख्य अतिथि इंजीनियर हरेन्द्र गौतम ने कहा के की भगवान तथागत बुद्ध का बौद्ध धर्म विज्ञान पर आधारित नही बल्कि विज्ञान  बुद्ध के द्वारा स्थापित बौद्ध धर्म पर आधारित है । आज पानी को पेड़ की जड़ों में डालने की जरूरत है , न कि पत्तियों में।  तभी यह वृक्ष रूपी समाज हरा भरा होगा । 
     अंत में बौद्ध भिक्षु विवेकानंद ने मंगल कामना के साथ कार्यक्रम के समापन की घोषणा की । आए हुए अतिथियों के प्रति संस्था के अध्यक्ष बीडी सुमन ने आभार व्यक्त किया एवं अतिथियों को भी अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया।

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