इमामे हुसैन की शहादत को भूल नहीं पाएगा जमाना


इमामे हुसैन की शहादत को भूल नहीं पाएगा जमाना

 अक्षयमेल समाचार

बछरावां रायबरेली--बछरावां में आशूरे के दिन यानी दसवीं मुहर्रम तरबूज मंडी से सैकड़ों ताजिया का जुलूस हजारों लोगों की तादाद में अपने पैगंबर के गम को मनाते हुए कर्बला की ओर प्रस्थान किया।  मुहर्रम महीने के १०वें दिन को 'आशुरा' कहते है। आशुरा के दिन हजरत रसूल के नवासे हजरत इमाम हुसैन को और उनके बेटे घरवाले और उनके सथियों को करबला के मैदान में शहीद कर दिया गया था।
सन् 680 में इसी माह में कर्बला नामक स्थान मे एक धर्म युद्ध हुआ था, जो पैगम्बर हजरत मुहम्म्द साहब के नाती तथा इब्न ज़्याद के बीच हुआ। इस धर्म युद्ध में वास्तविक जीत हज़रत इमाम हुसैन की हुई। प‍र जाहिरी तौर पर इब्न ज़्याद के कमांडर शिम्र ने हज़रत हुसैन रज़ी और उनके सभी 72 साथियो (परिवार वालो) को शहीद कर दिया था। जिसमें उनके छः महीने की उम्र के पुत्र हज़रत अली असग़र भी शामिल थे। और तभी से तमाम दुनिया के ना सिर्फ़ मुसलमान बल्कि दूसरी क़ौमों के लोग भी इस महीने में इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत का ग़म मनाकर उनकी याद करते हैं। आशूरे के दिन यानी 10 मुहर्रम को एक ऐसी घटना हुई थी, जिसका विश्व इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। इराक स्थित कर्बला में हुई यह घटना दरअसल सत्य के लिए जान न्योछावर कर देने की जिंदा मिसाल है। इस घटना में हजरत मुहम्मद के नवासे  हजरत हुसैन को शहीद कर दिया गया था बछरावां थाना अध्यक्ष रविंद्र सिंह की निगरानी में ताजिए जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से निकाला गया इस मौके पर नगर अध्यक्ष राम जी समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शकील मंसूरी सहित भारी संख्या में हिंदू मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग शामिल हुए हैं

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