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नई दिल्ली। अर्थव्यवस्था को लेकर मोदी सरकार की चिंताएं बढ़ती दिखाई दे रही हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी आर्थिक विकास का अनुमान घटाकर 6.9 फीसदी कर दिया है।
रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2020 की दूसरी छमाही के लिए खुदरा मुद्रास्फीति 3.5 से 3.7 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। वहीं दूसरी तिमाही में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति 3.1 फीसदी रहने का अनुमान है।
अभी हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भी वित्त वर्ष 2019 और 2020 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान को घटाया था। आईएमएफ ने अपने वर्ल्ड इकोनॉमिक अपडेट में वित्त वर्ष 2019 के लिए सात फीसदी और 2020 में 7.2 फीसदी का अनुमान लगाया था। इसमें 0.30 फीसदी की कटौती की गई थी। इससे भारत की घरेलू डिमांड अनुमान से ज्यादा कमजोर रहने के संकेत मिलते हैं।
इससे पहले भारत से दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था का ताज भी छिन गया था। साल 2018 में अर्थव्यवस्था सुस्त रहने की वजह से विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक भारत अब सातवें स्थान पर पहुंच गया है।
देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में मंदी के चलते पिछले तीन महीनो में लाखो लोग बेरोज़गार हो गए हैं। वहीँ कई ऑटोमोबाइल कंपनियों के डीलर पॉइंट और एजेंसियां बंद होने से ऑटोमोबाइल सेक्टर में बरोजगारी और बढ़ने की उम्मीद ज़ाहिर की गयी है।
वहीँ धीमी पड़ती विकास दर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के लिए इसलिए और बड़ी चुनौती है क्योंकि उसने 2025 तक देश की अर्थव्यवस्था पांच ट्रिलियन डॉलर (350 लाख करोड़ रुपये) होने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सालाना विकास दर 9 फीसदी से ज्यादा रहनी चाहिए, जबकि रफ्तार घटने के संकेत मिल रहे हैं।

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